राज्यपाल ने गोरखपुर में विज्ञान प्रदर्शनी का किया अवलोकन
6 अगस्त, 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षोत्सव तथा फार्मेसी संस्थान के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में फार्मेसी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत संयुक्त परियोजना “Medication Awareness: Know Your Common Medicines” विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
इस अभिनव परियोजना के अंतर्गत 3D Smart Hospital (DDU City Care Hospital) तथा “From Molecule to Medicine: The Complete Pharmaceutical Manufacturing Process” पर आधारित फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री मॉडल को एकीकृत रूप में प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी ने आगंतुकों एवं विशिष्ट अतिथियों को अत्यधिक प्रभावित किया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से काफी समय तक संवाद करते हुए मॉडल के प्रत्येक चरण की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने उन्हें आधुनिक स्मार्ट हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली, फार्मेसी स्टोर, औषधि निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया, दवाओं के सुरक्षित उपयोग तथा मेडिकेशन अवेयरनेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी।
राज्यपाल ने विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री मॉडल की सराहना करते हुए औषधि निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता के प्रति विद्यार्थियों की समझ तथा प्रस्तुति शैली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और औषधि निर्माण जैसे विषयों को इस प्रकार व्यावहारिक एवं सरल मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत करना अत्यंत सराहनीय प्रयास है।
संवाद के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि यदि मॉडल में प्रदर्शित दवाइयाँ तैयार की गई हैं, तो क्या वे पूर्णतः शुद्ध (Pure) हैं। विद्यार्थियों द्वारा सकारात्मक उत्तर दिए जाने पर उन्होंने कहा कि किसी भी दवा की शुद्धता का अंतिम प्रमाण केवल उसके निर्माण से नहीं मिलता, बल्कि उसे Quality Control (QC) एवं Quality Assurance (QA) की वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजरना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षण के बाद दवा निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पाई जाती है, तभी उसका उपयोग किया जाना चाहिए। यदि परीक्षण में कोई कमी सामने आती है, तो निर्माण प्रक्रिया अथवा फॉर्मूलेशन में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्रोत से प्राप्त दवाएँ गुणवत्ता परीक्षण में मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, तो उनका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
राज्यपाल द्वारा दिए गए ये सुझाव विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहे। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण औषधि निर्माण, रोगी सुरक्षा तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर विशेष बल दिया और विद्यार्थियों को भविष्य में भी अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
यह संयुक्त परियोजना आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, स्मार्ट हॉस्पिटल, फार्मेसी स्टोर, मेडिकेशन अवेयरनेस, औषधि निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं गुणवत्ता आश्वासन की संपूर्ण अवधारणा को एक ही मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का उत्कृष्ट उदाहरण रही। प्रदर्शनी में उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अन्य आगंतुकों ने भी दोनों मॉडलों की अत्यधिक सराहना की।
इस सफल परियोजना का निर्माण फार्मेसी विभाग के दस विद्यार्थियों की टीम ने सामूहिक प्रयास से किया। टीम के सदस्य हैं— मोहम्मद अनज़र, शाश्वत तिवारी, आयुषी द्विवेदी, यदुनंदन चौहान, गरिमा कुशवाहा, अनुष्का गुप्ता, अमृता मिश्रा, आकृति जायसवाल, शालू साहनी एवं मोहम्मद अदाब। सभी विद्यार्थियों ने समन्वित टीमवर्क, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता का परिचय देते हुए इस परियोजना को सफल बनाया।
विद्यार्थियों ने कहा कि राज्यपाल द्वारा दोनों मॉडलों की सराहना तथा विद्यार्थियों के साथ किया गया विस्तृत संवाद इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए न केवल गर्व का विषय है, बल्कि भविष्य में उत्कृष्ट शोध, नवाचार और समाजोपयोगी फार्मास्यूटिकल कार्यों के लिए प्रेरणा का भी स्रोत बनेगा। यह उपलब्धि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार की संस्कृति और विद्यार्थियों की प्रतिभा का सशक्त परिचायक है।

