राज्यपाल पटेल की अध्यक्षता में CSJMU में आयोजित हुआ ‘एआई मंथन-2.0’
13 सितम्बर, 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन, उत्तर प्रदेश एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई मंथन-2.0’ का छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में समापन हुआ।
राज्यपाल पटेल ने सीएसजेएमयू-आईबीएम बीओबी एआई हैकाथॉन-2026’ की विजेता टीमों को पुरस्कृत किया। इसके साथ ही हैकाथॉन के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नोडल केंद्रों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
राज्यपाल पटेल ने अपने सम्बोधन में कहा कि दो दिवसीय आयोजन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य, कृषि, रोबोटिक्स, पर्यावरण, शहरी विकास, शासन और रोजगार के बदलते परिदृश्य से जोड़कर समझने का सार्थक प्रयास किया गया है। विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण एवं गंभीर सहभागिता इस आयोजन की विशेष उपलब्धि रही है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज के परिवर्तनशील समय की सबसे प्रभावशाली और क्रांतिकारी शक्तियों में से एक है। यह हमारे पढ़ने, सीखने और शोध करने के तरीकों के साथ-साथ प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी बदल रही है तथा सामाजिक समस्याओं के समाधान के नए रास्ते खोल रही है। प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान इस परिवर्तन के केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागी और मार्गदर्शक बन रहे हैं। जनवरी माह में डॉ. ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित ‘एआई मंथन-1.0’ से लेकर आज के ‘एआई मंथन-2.0’ तक की यात्रा इसका प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में 7 लाख से अधिक स्नातक विद्यार्थियों ने एआई के आधारभूत पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जबकि 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम में साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त 3 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में तकनीकी सहायता का उपयोग किया गया है। यह उच्च शिक्षा संस्थानों में तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और बदलती कार्य संस्कृति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक एआई परिदृश्य में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। ‘इंडिया एआई मिशन’ जैसे दूरदर्शी प्रयासों के माध्यम से एआई को केवल प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों तक सीमित न रखते हुए इसके लाभों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एआई वर्तमान की वास्तविकता और भविष्य की अनिवार्यता बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि ए0आई0 को केवल एक विषय के रूप में पढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर विषय में एआई की संभावनाओं को जोड़ना होगा। गणित में एआई आधारित समस्या समाधान, विज्ञान में डेटा विश्लेषण, कृषि में स्मार्ट फार्मिंग एवं मौसम पूर्वानुमान, चिकित्सा में प्रारंभिक रोग पहचान, पर्यावरण में प्रदूषण एवं जैव-विविधता की निगरानी, इंजीनियरिंग में रोबोटिक्स तथा भाषा शिक्षा में प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में एआई नई दृष्टि प्रदान कर सकती है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि भविष्य में सबसे मूल्यवान व्यक्ति वह नहीं होगा, जिसके पास केवल अधिक जानकारी हो, बल्कि वह होगा जो सही प्रश्न पूछ सके, सही जानकारी को पहचान सके और उसका समाजहित में उचित उपयोग कर सके। इसलिए भविष्य के अनुरूप पाठ्यक्रम में एआई साक्षरता, डेटा लिटरेसी, डिजिटल लिटरेसी और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को महत्वपूर्ण स्थान देना होगा।
उन्होंने ‘लर्निंग बाय डूइंग’ पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थी केवल पुस्तकों में एआई का अध्ययन न करें, बल्कि इसकी सहायता से वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करें। किसान की समस्या का समाधान, जल संरक्षण का मॉडल, ट्रैफिक प्रबंधन, कुपोषण की पहचान, भाषाओं एवं बोलियों का संरक्षण तथा दिव्यांगजनों के लिए सहायक तकनीक जैसे विषय विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारत के पास हजारों वर्षों की समृद्ध ज्ञान परंपरा है। गणित, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, दर्शन, साहित्य, योग और कृषि से संबंधित पारंपरिक ज्ञान हमारी अमूल्य विरासत है। आधुनिक एआई और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच संवाद स्थापित करना समय की आवश्यकता है। एआई हमारी प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, विलुप्त होती भाषाओं एवं बोलियों के संरक्षण, पुरातात्विक धरोहरों के डिजिटल पुनर्निर्माण तथा लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से भारतीय ज्ञान एवं पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। उन्होंने महर्षि सुश्रुत द्वारा संस्कृत में रचित ‘सुश्रुत संहिता’ का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि सुश्रुत को शल्य चिकित्सा और प्लास्टिक सर्जरी का जनक माना जाता है। उन्होंने 300 से अधिक प्रकार की शल्य प्रक्रियाओं और 120 से अधिक शल्य उपकरणों का वर्णन किया था। उस समय एनेस्थीसिया के लिए आयुर्वेदिक विधियों का उपयोग किए जाने का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने स्कॉटलैंड स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग में महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा स्थापित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के लिए गौरव का विषय है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी एआई का विकास भारतीय प्रतिभाओं, भारतीय डेटा और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना पर होना चाहिए। इससे तकनीकी संप्रभुता और डेटा सुरक्षा मजबूत होगी तथा भारत तकनीकी निर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में अग्रसर होगा। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, क्लाउड एवं कंप्यूटिंग क्षमता तथा ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्यगामी क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास आने वाले दशक के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि हमारे युवाओं के हाथ में केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि कौशल का प्रमाण होना चाहिए। उनके पास केवल नौकरी की तलाश नहीं, बल्कि रोजगार देने की क्षमता भी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देते हुए एआई के माध्यम से विशाल शोध-साहित्य एवं आंकड़ों के विश्लेषण, नए शोध-विषयों की पहचान और नए समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन में भी एआई के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि प्रवेश, परीक्षा, उपस्थिति, छात्रवृत्ति, प्रमाण-पत्र, शिकायत निवारण, पुस्तकालय एवं संसाधन प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है। ‘समर्थ पोर्टल’ जैसे डिजिटल मंचों ने उच्च शिक्षा की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। अब इन प्रक्रियाओं को एआई से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं एवं उत्तरों के मूल्यांकन में एआई आधारित तकनीकी सहायता के उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और अधिक एकरूप हो सकती है, लेकिन शिक्षक का निर्णय सर्वोपरि रहना चाहिए। एआई मूल्यांकन में सहयोगी हो सकती है, अंतिम निर्णायक नहीं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि एआई रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर प्रदान कर रही है। विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं की पहचान कर एआई की सहायता से उनके समाधान विकसित करें, विश्वविद्यालय उन्हें प्रयोगशाला, मार्गदर्शन एवं संसाधन उपलब्ध कराएं, उद्योग उन्हें बाजार से जोड़ें और उनके विचार नए उद्यम का रूप लें। यही शिक्षा से उद्यमिता, विचार से उत्पाद और विद्यार्थी से राष्ट्र-निर्माता बनने की यात्रा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण, एआई टूल्स के व्यावहारिक एवं जिम्मेदार उपयोग, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी का ज्ञान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, शिक्षकों को भी एआई-रेडी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में नियमित फैकल्टी एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की आवश्यकता बताई। शिक्षक और एआई के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग का संबंध विकसित किया जाना चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार कृषि है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, तापमान में बदलाव, मृदा की गुणवत्ता, कीट एवं रोग तथा बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों के समाधान में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मौसम, मृदा, फसल, सिंचाई, उपग्रह चित्रों और बाजार से संबंधित आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर किसानों को समय पर उचित जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रोगों की पहचान, उपचार, अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रोगी की जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय इतिहास, चिकित्सा चित्रों, जैविक संकेतकों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का एकीकृत विश्लेषण कर चिकित्सकों को रोग की पहचान एवं जोखिम के आकलन में सहायता मिल सकती है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि एआई मंथन में कैंसर की पहचान, रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला चिकित्सा, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और डिजिटल हेल्थ से लेकर क्रॉप डेटा एनालिसिस, जलवायु-स्मार्ट कृषि, कृषि पूर्वानुमान, फसल प्रबंधन और प्रिसीजन एग्रीकल्चर जैसे विषयों पर चर्चा हुई है। अब विश्वविद्यालयों को इन क्षेत्रों में चयनित पायलट परियोजनाएं शुरू कर उनके परिणामों का वैज्ञानिक आकलन करना चाहिए।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि एआई केवल तकनीकी विषय नहीं है। यह समाज, रोजगार, सामाजिक संबंधों और लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित कर रही है तथा निजता, समानता और नैतिकता से जुड़े नए प्रश्न भी खड़े कर रही है। इन प्रश्नों के समाधान के लिए तकनीक के साथ समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन और विधि जैसे विषयों के बीच संवाद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी डेटा की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय निर्णय के महत्व को समझें। ‘सेफ एंड ट्रस्टेड एआई’ केवल किसी मिशन का एक स्तंभ नहीं, बल्कि हमारी पूरी एआई यात्रा का आधार होना चाहिए।
राज्यपाल पटेल ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग हितों और परिस्थितियों वाले देश भी संवाद के माध्यम से महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सहमति बना सकते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एवं विश्व व्यापार संगठन में सुधार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और गाजा की मानवीय स्थिति, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे, एआई एवं साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में सहयोग तथा मजबूत परिवहन व्यवस्था जैसे विषयों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि शांति स्थापना में महिलाओं का नेतृत्व महत्वपूर्ण है। वैश्विक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए और भविष्य में प्रमुख वैश्विक संस्थाओं के नेतृत्व में भी महिलाओं को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसे वैश्विक घटनाक्रमों, उनमें बनने वाली सहमति और भारत की भूमिका से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे वैश्विक परिवर्तनों को व्यापक दृष्टिकोण से समझ सकें।
राज्यपाल जी ने निर्देश दिया कि ‘ए0आई0 मंथन-2.0’ में हुए विचार-विमर्श को स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्ययोजना में बदला जाए। उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन, स्वास्थ्य, कृषि और विद्यार्थी कौशल विकास के क्षेत्र में प्राथमिक परियोजनाएं निर्धारित कर उनके लिए जिम्मेदारियां तय करनी चाहिए तथा उनकी नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई-सक्षम बनाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय निगरानी, यातायात, शहरी नियोजन और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग के लिए विश्वविद्यालयों को शासन और प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को नई गति देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग की वास्तविक समस्याएं विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं तक आएं और विश्वविद्यालयों में विकसित समाधान उद्योग एवं समाज तक पहुंचें। संयुक्त शोध, इंटर्नशिप, लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से इस दूरी को कम किया जा सकता है।
विद्यार्थियों से राज्यपाल जी ने कहा कि एआई से डरिए मत, उसे समझिए; उसके केवल उपयोगकर्ता मत बनिए, उसके नवाचारकर्ता बनिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रचनात्मकता, जिज्ञासा और मानवीय संवेदना को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति ने मशीनों की शक्ति बढ़ाई, सूचना क्रांति ने दुनिया को जोड़ा और आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की बौद्धिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रही है। यह केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि आने वाले समय की कार्यशैली, शिक्षा, शोध, प्रशासन, उद्योग और सामाजिक व्यवस्था को बदलने वाली शक्ति है। ऐसे में विश्वविद्यालय इस परिवर्तन से अलग नहीं रह सकते।
राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को इस परिवर्तन का केवल दर्शक नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनना होगा। विश्वविद्यालय केवल डिग्री न दें, बल्कि दृष्टि दें; केवल रोजगार न दें, बल्कि रोजगार सृजन की क्षमता विकसित करें; केवल शोध न करें, बल्कि शोध को समाज तक पहुंचाएं और केवल तकनीक न सिखाएं, बल्कि उसके जिम्मेदार उपयोग की समझ भी विकसित करें।
उन्होंने कहा कि ‘एआई मंथन-2.0’ का औपचारिक समापन हो रहा है। यह अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। प्रत्येक विश्वविद्यालय अपने लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करे, प्राथमिक परियोजनाएं चुने, जिम्मेदारियां तय करे और उनकी नियमित समीक्षा करे। उन्होंने कहा, “मंथन समाप्त हो रहा है, लेकिन मिशन शुरू हो रहा है।
राज्यपाल पटेल ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘एआई मंथन-2.0’ से निकली ऊर्जा उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों को नई दिशा प्रदान करेगी और प्रदेश को एआई के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने देश के विभिन्न भागों से पधारे विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, आयोजकों, विश्वविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
समापन अवसर पर राज्यपाल के विशेष कार्य अधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर एम. बोबड़े ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एआई के सुनियोजित उपयोग के लिए नीति निर्माण और क्रियान्वयन की अलग व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए पांच विशेषज्ञों वाला एआई पॉलिसी एडवाइजरी ग्रुप तथा पांच कुलपतियों का एआई इम्प्लीमेंटेशन ग्रुप गठित किया जाएगा। नीति सलाहकार समूह की अध्यक्षता आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पी.पी. चक्रवर्ती करेंगे, जबकि प्रो. वी. रामगोपाल राव, वी.एम. हसनना, डॉ. प्रीतिका रंगराजन और प्रो. विनय कुमार पाठक सदस्य होंगे। इम्प्लीमेंटेशन ग्रुप में तकनीकी शिक्षा के लिए डॉ. जे.पी. पांडे, चिकित्सा शिक्षा के लिए केजीएमयू के कुलपति, कृषि शिक्षा के लिए अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह तथा सामान्य विश्वविद्यालयों के लिए मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति को जिम्मेदारी दी जाएगी और प्रो. के.पी. सिंह सहयोगी के रूप में शामिल होंगे। इस व्यवस्था में संबंधित क्षेत्रों के अन्य विश्वविद्यालयों को भी जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के बीच क्षेत्र और स्थापना अवधि के आधार पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। 50 वर्ष से अधिक पुराने विश्वविद्यालयों के लिगेसी डेटा अभिलेख, दस्तावेज और तस्वीरों सहित को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर एआई मॉडल की ट्रेनिंग में उपयोग किया जाएगा। एआई मंथन 2.0 से सामने आए 14 विचारों में 1.0, रिसर्च, मल्टी-डिसिप्लिनरी, मल्टी-मोडल डेटा, इनोवेशन, ट्रांसलेशनल लैब्स, एलएलएम, लोकल, सेक्टर स्पेसिफिक अथवा स्मॉल लैंग्वेज मॉडल, स्केल, 5.0, ह्यूमन इन द लूप तथा सॉवरेन शामिल हैं। उन्होंने एआई को ‘असिस्टेंट या स्लेव, नॉट ऐज ए मास्टर’ के सिद्धांत पर अपनाने तथा ‘ह्यूमन इन द लूप’ को आवश्यक बताते हुए कहा कि एआई मनुष्य का सहायक बने, उसका मास्टर नहीं। उन्होंने दोनों समूहों के गठन की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने तथा एआई को उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी माध्यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की डॉ0 प्रियंका पांडे ने बताया कि छात्रों की रोजगार क्षमता, नवाचार और शैक्षणिक परिणामों में सुधार के लिए क्षमता निर्माण, मंत्रालय समर्थित प्रस्तावों और पाठ्यक्रम विस्तार से जुड़ी छह माह की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। एबीपीएल इंटरनेशनल के सहयोग से अकादमिक-उद्योग अंतर को कम करने की पहल की जा रही है। इस अवसर पर झांसी में विश्वविद्यालयों के लिए एआई आधारित ‘द्रोण’ प्रणाली का शुभारंभ किया गया, जो छात्र, शिक्षक और विश्वविद्यालय स्तर पर कार्य करेगी।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के प्रो. आलोक कुमार ने बताया कि एआई प्रमोशन सेल के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन में एआई का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। 15 विद्यार्थियों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से एआई इंटर्न नियुक्त कर 22 एआई परियोजनाओं पर लगाया गया है, जिनमें छह पूर्ण हो चुकी हैं। ‘कैमएआई रिसर्च’ के तहत एक वर्षीय मेजर और छह माह के माइनर शोध प्रोजेक्ट संचालित हैं। पिछले छह माह में रोबोटिक्स, ड्रोन, आइडिया, सुपरकंप्यूटर, साइबर सिक्योरिटी और आईओटी लैब स्थापित की गई हैं। ‘हैक्सहोर’ और ‘गिग्नेटी विदाउट कोड’ जैसे हैकाथॉन के माध्यम से गैर-कंप्यूटर साइंस एवं गैर-इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को भी बिना कोड लिखे नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। सभी विभागों के लिए एआई आधारित कॉन्फ्रेंस और एफडीपी अनिवार्य किए गए हैं तथा वेबसाइट पर दो एआई चैटबॉट सक्रिय हैं, जिनमें ‘नारद एडमिशन पोर्टल’ विद्यार्थियों को योग्यता और पसंद के आधार पर पाठ्यक्रम चयन में सहायता करता है।
एकेटीयू लखनऊ के परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया ने बताया कि सत्र 2026-27 से सभी शाखाओं में दो-क्रेडिट का एआई कोर्स तथा सभी विषयों में एआई की एक यूनिट जोड़ने की योजना है। परीक्षा व्यवस्था को एआई आधारित बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों की 3डी मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित प्रवेश पत्र और बायोमेट्रिक उपस्थिति वाली प्रणाली विकसित की जा रही है।
हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी की प्रो. वंदना दीक्षित कौशिक ने बताया कि शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन और क्षमता निर्माण में एआई को शामिल करते हुए एआईएमएल में बीटेक, सिग्नल प्रोसेसिंग एवं मशीन लर्निंग में एमटेक और एआईएमएल माइनर कोर्स शुरू किए गए हैं तथा विभिन्न शाखाओं में आठ से अधिक एआई आधारित विषय पाठ्यक्रम में शामिल हैं। एआई मंथन 1.0 के बाद करीब 14 एफडीपी, 23 विशेषज्ञ व्याख्यान तथा स्कूली विद्यार्थियों के लिए समर एवं विंटर एआई कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्मार्ट हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, ब्रांच ट्रांसफर मॉड्यूल और ‘एआई मित्र’ चैटबॉट विकसित किए गए हैं। एक करोड़ एक लाख रुपये से अधिक की एआई परियोजनाएं, 41 छात्र परियोजनाएं, 33 एआई शोध प्रकाशन, 19 एआई स्टार्टअप और 51 एआई शोधार्थी विश्वविद्यालय की प्रगति को दर्शाते हैं। ‘एआई फॉर एवरीवन’ 30 घंटे के पाठ्यक्रम में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एजेंटिक एआई, डीप लर्निंग तथा नैतिक एवं जिम्मेदार एआई का प्रशिक्षण देकर 720 विद्यार्थियों को प्रमाणित किया गया। सैमसंग इनोवेशन कैंपस के तहत एआई और आईओटी के तीन माह के पाठ्यक्रम भी संचालित किए गए।
केजीएमयू लखनऊ की ओर से डॉ. दुर्गेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में केजीएमयू को एआई उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। क्लिनिकल एआई, आउटरीच तथा शिक्षा-प्रशिक्षण एवं अनुसंधान इसके तीन प्रमुख स्तंभ होंगे। चैटबॉट, मरीज प्रबंधन और ड्रग इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही हैं तथा ई-संजीवनी 2.0 के माध्यम से 40 से अधिक स्पेशियलिटी एवं सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी संचालित हैं। एआई आधारित सीटी स्कैन, हाई-एंड एमआरआई, जीपीयू क्लस्टर, वर्चुअल ऑटोप्सी और वर्चुअल डिसेक्शन टेबल पर कार्य चल रहा है। 14 फैकल्टी-नेतृत्व वाले शोध प्रोजेक्ट और 11 छात्र परियोजनाएं संचालित हैं। करीब 10 करोड़ रुपये के भारत सरकार के प्रोजेक्ट से ब्रेन नेटवर्क, स्ट्रक्चरल एवं फंक्शनल कनेक्टोम तथा एआई आधारित एटलस विकसित किया जाएगा। मैनिटोबा विश्वविद्यालय के सहयोग से डेटा साइंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। वार्षिक शोध पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ एआई थीसिस पुरस्कार तथा करीब 13 करोड़ रुपये से एआई उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो. आनंद के. त्यागी ने बताया कि सामाजिक विज्ञान केंद्रित विश्वविद्यालय में एआई का मूल मंत्र मानव उन्नति, अकादमिक उत्कृष्टता और सामाजिक हित रखा गया है। एआई मंथन-1 के बाद फाउंडेशन वर्कशॉप, एफडीपी और ई-कंटेंट डेवलपमेंट वर्कशॉप आयोजित की गईं तथा एआई मंथन-2 के बाद 17 से 23 सितंबर तक उच्च शिक्षा पर एमएमटीसी कार्यक्रम प्रस्तावित है। कौशल विकास पाठ्यक्रम 19 से बढ़कर 36 हुए हैं। यूजी-पीजी कार्यक्रमों तथा पीएचडी रिसर्च मेथडोलॉजी में एआई को शामिल किया गया है और शिक्षण, ई-कंटेंट, परीक्षा, मूल्यांकन, शोध, फील्ड वर्क, सेमिनार, एफडीपी, प्रवेश, छात्र सेवाओं, प्रशासन, दस्तावेजीकरण एवं मीडिया में इसका उपयोग बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने अकादमिक सत्यनिष्ठा, मौलिकता और डेटा गोपनीयता पर जोर देते हुए एआई को सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल करने और अंतिम निर्णय मानव द्वारा लिए जाने की बात कही। सहायक प्राध्यापक भर्ती में भी एआई के उपयोग की योजना है।
कृषि क्षेत्र में डॉ. एस.यू.एस. राजू, कुलपति ने कहा कि एआई का उपयोग शिक्षण एवं अनुसंधान के साथ कृषि विस्तार और किसान आउटरीच में भी किया जाएगा। ‘जमीन से लैब और लैब से जमीन’ की अवधारणा को मजबूत करने, अनुसंधान से प्राप्त तकनीक को किसानों तक पहुंचाने तथा ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही बढ़ाने में एआई उपयोगी होगा। प्रिसिजन फार्मिंग और स्मार्ट कृषि के माध्यम से किसानों को पानी, उर्वरक एवं अन्य इनपुट की आवश्यकता की सटीक जानकारी मिल सकेगी, जिससे संसाधनों की बचत होगी। बीज, मिट्टी और मौसम आधारित कृषि व्यवस्था में एआई के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की पहचान एवं बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अमित देवगन ने चिकित्सा शिक्षा में एआई की व्यापक संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि तकनीक का सही उपयोग करना भी सिखाया जाना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल, नर्सिंग और डेंटल शिक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए। पाठ्यक्रम, शिक्षण और मूल्यांकन तीनों में एआई को जोड़ने तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एआई से सटीक एवं उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए सही प्रश्न पूछना सिखाने की आवश्यकता है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों और इंजीनियरिंग संस्थानों के सहयोग से चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहतर एआई समाधान विकसित करने पर भी जोर दिया।

