Saturday, August 8, 2026
Uttar Pradesh

राज्यपाल ने हथकरघा दिवस पर घुमंतू जनजाति महिलाओं को किया सम्मानित

7 अगस्त, 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर समरसता सेवा संस्थान एवं घुमंतू जनजाति परिषद द्वारा सिलाई एवं कढ़ाई का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली घुमंतू जनजाति की महिलाओं के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर सिलाई एवं कढ़ाई प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली महिलाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
राज्यपाल जी ने महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उनके हुनर और रचनात्मकता की सराहना की। कार्यक्रम में घुमंतू जनजाति परिषद एवं अन्य समुदायों द्वारा चयनित बच्चों ने सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसकी राज्यपाल जी ने सराहना करते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर महिलाओं को 10 सिलाई मशीनें भी प्रदान की गईं, ताकि वे प्रशिक्षण में सीखे गए हुनर का उपयोग कर स्वरोजगार से जुड़ सकें तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।

राज्यपाल ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं के हुनर और मेहनत को सम्मानित कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि हुनर और आत्मनिर्भरता महिलाओं को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सिलाई-कढ़ाई जैसे कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाते हुए स्वरोजगार से जुड़ सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि उन्हें जो भी हुनर सिखाया जाए, उसे पूरी लगन और मेहनत से सीखें तथा उसमें दक्षता हासिल करें।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से घुमंतू एवं वंचित समुदायों को कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और आजीविका के साधन उपलब्ध कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का निरंतर कार्य किया जा रहा है। पात्र लोगों को भूमि के पट्टे, आवास तथा शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक योजना का उद्देश्य यही है कि देश के प्रत्येक पात्र नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि घुमंतू एवं वंचित समुदाय के ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाए, जिन्हें अभी तक विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। ग्राम प्रधान इस संबंध में पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराएं तथा सूची की एक प्रति राज्यपाल कार्यालय को भी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि जब तक पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक प्रयास जारी रखे जाएंगे।

सिलाई एवं कढ़ाई का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली महिलाओं को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र के संबंध में राज्यपाल ने कहा कि प्रमाण-पत्र पर प्रशिक्षण की अवधि तथा प्रशिक्षण के दौरान सिखाए गए कौशल का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इससे महिलाओं को आगे रोजगार अथवा स्वरोजगार प्राप्त करने में प्रमाण-पत्र का उपयोग करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए हुनर में दक्षता हासिल करना भी आवश्यक है।

राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने खाली पड़े शैक्षणिक भवनों एवं संसाधनों का उपयोग करते हुए ऐसे कम से कम 500 युवाओं अथवा ऐसे व्यक्तियों के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करें, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी शिक्षा बीच में छोड़ दी है, लेकिन कोई हुनर सीखकर अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। प्रशिक्षण के उपरांत इन युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए।

उन्होंने घुमंतू समुदाय के लोगों से आह्वान किया कि वे ऐसे कम से कम 100 लोगों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराएं, जिन्हें किसी कौशल का प्रशिक्षण प्राप्त करना है। ऐसे लोगों को विश्वविद्यालयों के माध्यम से उनकी रुचि एवं आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा तथा प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि इस कार्य में समुदाय के लोगों को भी अपना सहयोग देना होगा। प्रशिक्षण के लिए नाम देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की प्रशिक्षण कार्यक्रम में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रशिक्षण को गंभीरता से लेते हुए पूरी लगन एवं मेहनत के साथ सीखना होगा, तभी प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा और सीखे गए हुनर को रोजगार एवं आजीविका का माध्यम बनाया जा सकेगा।

राज्यपाल ने उपस्थित बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे असामाजिक तत्वों से दूर रहें और अपने जीवन को सुरक्षित रखते हुए शिक्षा एवं अपने भविष्य पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी बेटियां भी हैं, जिन्हें परिस्थितिवश बालिका गृहों में रहना पड़ता है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा इन बेटियों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, पाक-कला, स्वास्थ्य देखभाल एवं पोषण की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बालिका गृहों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी लेती हैं। समाज एवं विश्वविद्यालयों के सहयोग से इन बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि काशी जनपद के बालिका गृह में रहने वाली बेटियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर संस्थानों में रोजगार से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। राज्यपाल ने बताया कि दसवीं कक्षा उत्तीर्ण आदिवासी बेटियों को आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए साइकिल उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि आवागमन की सुविधा के अभाव में उनकी पढ़ाई बाधित न हो।

राज्यपाल ने सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहीं ढाई हजार ‘ग्रीन आर्मी’ की महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता, नशामुक्ति, तालाबों की खुदाई एवं साफ-सफाई सहित अनेक सामाजिक उत्थान के कार्य कर रही हैं। उनके कार्यों की जानकारी मिलने पर राज्यपाल जी ने स्वयं इन महिलाओं से संवाद कर उनके कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि इन महिलाओं को जन भवन आमंत्रित कर सम्मानित किया गया तथा उनकी आवश्यकताओं के संबंध में भी जानकारी ली गई। सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं को समाज के सहयोग से मीरजापुर जनपद में सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गईं। साथ ही, जिलाधिकारी से समन्वय कर उनके कार्यों के संचालन के लिए आवास की व्यवस्था भी कराई गई।

उन्होंने कहा कि महाकुंभ के बाद वहां श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए वस्त्रों को इन महिलाओं द्वारा एकत्र कर उनकी धुलाई एवं स्वच्छता के बाद उनसे बैग और अन्य परिधान तैयार किए जा रहे हैं। इस कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने जिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त को इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के विपणन एवं बिक्री की उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अपने कार्य से आर्थिक आय प्राप्त हो सके। महिलाओं द्वारा इस कार्य से और अधिक महिलाओं को जोड़ने की इच्छा व्यक्त किए जाने पर उनकी मांग के अनुरूप उन्हें हरी साड़ियां भी उपलब्ध कराई गईं।

उन्होंने बताया कि इन महिलाओं को चप्पल निर्माण के लिए सामग्री खरीदने हेतु जन भवन की ओर से 8.50 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई। महिलाएं अच्छी गुणवत्ता के चप्पलें तैयार कर रही हैं। राज्यपाल ने बताया कि इन महिलाओं द्वारा निर्मित स्लीपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए थे, जिसकी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से सराहना की। राज्यपाल ने भी महिलाओं द्वारा निर्मित स्लीपर स्वयं खरीदकर उनके हुनर एवं प्रयासों को प्रोत्साहित किया। पढ़े-लिखे युवा एवं विद्यार्थी इन महिलाओं के कार्य में सहयोग एवं मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्य को और बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने के लिए उन्हें एक वाहन भी उपलब्ध कराया गया है।

राज्यपाल ने प्रदेश में बेटियों के निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि जन भवन में सीरम इंस्टीट्यूट के सहयोग से उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जनपदों की बालिकाओं के लिए 3 लाख एचपीवी वैक्सीन डोज उपलब्ध कराने हेतु समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है और टीकाकरण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह अभियान जनसहयोग से उनके द्वारा संचालित किया गया, जिसे अब प्रधानमंत्री के प्रयासों से बेटियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 5,91,759 एचपीवी टीकाकरण संपन्न हो चुके हैं।

राज्यपाल ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए गुजरात में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने वंचित समुदायों के लोगों को सरकारी भूमि चिन्हित कर एक स्थान पर व्यवस्थित रूप से रहने के लिए प्रेरित किया। वहां आंगनबाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था कराने के साथ-साथ कौशल विकास का कार्य भी किया गया। उन्होंने कहा कि समूह में बहुत शक्ति होती है। यदि लोग संगठित होकर समूह में रहते हैं तो सरकार के लिए भी उनके हित में योजनाएं संचालित करना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान होता है। उन्होंने बेटियों एवं उपस्थित लोगों का आह्वान किया कि खूब पढ़ें, मेहनत करें और अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।

समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और समानता की भावना को मजबूत करने की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रेरणा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जी सभी वर्गों के लोगों से मिलती हैं, उनकी समस्याओं एवं पीड़ा को सुनती हैं और उनके कल्याण के लिए आवश्यक कार्यों के संबंध में निरंतर मार्गदर्शन देती हैं।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि इन बच्चों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य का अवसर मिल सके। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू समाज के कल्याण एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए घुमंतू विकास बोर्ड का गठन किया गया है। यह बोर्ड मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करेगा तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जातियों की समस्याओं के समाधान, उनके विकास और कल्याण के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।

संस्थान के संस्थापक सुनील शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर प्रकाश डाला। श्रीमती रीना सिंह ने महिलाओं के उत्थान, उनके सशक्तिकरण एवं सामाजिक सहभागिता के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य पवन कुमार सिंह, घुमंतू जनजाति परिषद, अवध प्रांत के संगठन मंत्री श्री राजेश पांडेय, घुमंतू समुदाय के बड़ी संख्या में परिवारजन सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।