डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का 92वां दीक्षोत्सव हुआ संपन्न
3 अगस्त, 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा का 92वां दीक्षोत्सव संपन्न हुआ। समारोह में कुल 79,832 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 64 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 88 पदक प्रदान किए गए। इनमें 46 पदक छात्राओं तथा 18 पदक छात्रों को प्राप्त हुए।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के अंतर्गत जनपद आगरा के लिए 300 आंगनबाड़ी किट तथा जनपद इटावा के लिए 200 आंगनबाड़ी किट प्रदान कीं। राज्यपाल जी ने बताया कि पूरे प्रदेश में अब तक 71,293 आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा चुका है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। जनपद आगरा में 300 एवं इटावा में 300 कुल 600 बेटियों का टीकाकरण कराया गया, जिसमे पुलिसकर्मियों की बेटियां भी शामिल हैं। राज्यपाल ने शिक्षा के साथ-साथ पोषण, स्वास्थ्य एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने पर बल दिया।
राज्यपाल की प्रेरणा से विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को भी सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने स्वयं बच्चों को मंच पर आमंत्रित कर उन्हें माइक दिया और भाषण तथा कहानी प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया। एक नन्हीं छात्रा ने आंकड़ों सहित प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया, जबकि दूसरी बालिका ने अत्यंत प्रेरणादायक कहानी सुनाई। दोनों प्रस्तुतियों की उपस्थित जनसमूह ने मुक्त कंठ से सराहना की। इसके अलावा स्कूली बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत एवं लोकगीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। राज्यपाल जी ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने छोटे बच्चों की रचनात्मकता पर आधारित प्रदर्शनी का भी उल्लेख करते हुए बच्चों द्वारा तैयार की गई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिकृति की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षोत्सवों में बच्चों की प्रस्तुतियां देखकर उन्हें उन शिक्षकों पर गर्व होता है, जिन्होंने बच्चों में अभिव्यक्ति क्षमता, आत्मविश्वास और सृजनात्मक सोच का विकास किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यही बच्चे भविष्य में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे। साथ ही विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की प्रतिभा को निरंतर निखारने के लिए उन्हें बेहतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कृष्ण चंद गांधी सरस्वती शिशु मंदिर, मथुरा को डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 कंप्यूटर, 10 मॉनिटर, 10 कीबोर्ड, 10 माउस तथा 10 वाई-फाई यूएसबी एडाप्टर भी प्रदान किए।
दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियों ने छात्रों की अपेक्षा अधिक पदक अर्जित किए हैं, जो उनकी प्रतिभा, परिश्रम और बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ उनके माता-पिता तथा पति सम्मान समारोह में उपस्थित है। यदि बहू की उपलब्धि पर सास भी मंच पर आकर उसे आशीर्वाद और बधाई दे, तो यह परिवार और समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि अनुशासन बनाए रखते हुए विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी ऐसे गौरवपूर्ण अवसरों का सहभागी बनने का अवसर दिया जाए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अनेक माता-पिता खेतों और अन्य कठिन परिस्थितियों में दिन-रात मेहनत कर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाते हैं। उन्होंने एक मेधावी छात्र के किसान माता-पिता से हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और त्याग का सम्मान करना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है। विद्यार्थियों को मन लगाकर अध्ययन करना चाहिए और अपनी सफलता के माध्यम से माता-पिता के सपनों को साकार करना चाहिए।
छात्राओं को प्रेरित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जीवनसाथी का चयन धन-संपत्ति, मकान या गाड़ी देखकर नहीं, बल्कि उसके संस्कार, सम्मान और सहयोग की भावना को देखकर करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व और अधिक सशक्त होकर सामने आएगा।
राज्यपाल ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, ज्ञान, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का संदेश शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो आज भी युवाओं के लिए उतना ही प्रासंगिक है। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम न मानें, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का साधन बनाएं।
राज्यपाल ने समारोह के मुख्य अतिथि एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षक शिक्षा, शोध और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके अनुभव और विचार विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों को उत्कृष्टता और नवाचार के लिए प्रेरित करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने अनुभव किया कि वर्षों तक एक ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता था और उसमें समयानुकूल कोई बदलाव नहीं होता था। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्हें पाठ्यक्रम में आवश्यक परिवर्तन करने का अवसर मिला। इस दिशा में एनसीटीई का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। राज्यपाल ने कहा कि समय के साथ पाठ्यक्रम में बदलाव आवश्यक है और वर्तमान में विद्यार्थियों को नई आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।
समारोह में पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पारंपरिक चटाई बुनकर अर्धेंदु शेखर दास को प्राकृतिक सामग्री से पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प के माध्यम से भारतीय शिल्प परंपरा को समृद्ध करने के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक स्वरूप देकर न केवल उसे नई पहचान दिलाई है, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण कारीगरों, विशेषकर महिलाओं, को रोजगार उपलब्ध कराया है। उन्होंने श्री दास को बधाई देते हुए उनके कार्य को भारतीय लोककला, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण का प्रेरक उदाहरण बताया।
मानद उपाधि प्राप्त करने के बाद श्री अर्धेंदु शेखर दास ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय क्राफ्टरूट्स संस्था की संस्थापिका श्रीमती अनार पटेल को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सहयोग के कारण ही उन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आज वे जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें श्रीमती अनार पटेल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने अपने लगभग एक शताब्दी के गौरवपूर्ण सफर में लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उनके जीवन को नई दिशा और नई पहचान दी है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संचालित इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन सेल, इन्क्यूबेशन गतिविधियों तथा प्रयोगशाला से समाज तक की अवधारणा की सराहना करते हुए कहा कि इससे शोध कार्य समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जुड़ रहे हैं।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों को अध्ययन सामग्री, खेल सामग्री एवं अन्य शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी। किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की सक्रिय भूमिका को भी उन्होंने सराहनीय बताया।
राज्यपाल ने कहा कि संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि अध्यापकों, परिवार, सामाजिक वातावरण और संस्कारों से होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नकारात्मक सोच से दूर रहकर सकारात्मक कार्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद और विचार-विमर्श से निकाला जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि नकारात्मकता से प्रभावित हुए बिना निरंतर अच्छे कार्य करते हुए आगे बढ़े।
महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहली बार आठ से नौ महिला कुलपतियों की नियुक्ति हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पद पर नियुक्ति केवल योग्यता और क्षमता के आधार पर होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में नेतृत्व की पूर्ण क्षमता है और जो सबसे योग्य होगा, वही कुलपति बनेगा।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समाज में हो रहे सकारात्मक कार्यों से सीख लें तथा जहां कमियां दिखाई दें, वहां सुधार का प्रयास करें। उन्होंने विद्यार्थियों से भारत सरकार एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अध्ययन करने, उन पर निबंध लिखने, उनके परिणामों का मूल्यांकन करने और यह समझने का आह्वान किया कि इन योजनाओं से समाज को किस प्रकार लाभ मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ा जाए, जिससे उनमें राष्ट्र के विकास कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़े और वे आत्ममंथन करें कि उन्होंने स्वयं समाज और राष्ट्र के लिए क्या सकारात्मक योगदान दिया है।
राज्यपाल ने देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल ही में विक्रम-1 प्रक्षेपण यान की सफलता ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि 25 से 28 वर्ष के युवाओं ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है, इसलिए देश का प्रत्येक युवा भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त कर सकता है। उन्होंने गगनयान मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि निकट भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्वदेशी तकनीक के बल पर अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे, जो प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय होगा।
रक्षा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज देश आधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन तथा अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। रक्षा उत्पादन और निर्यात में निरंतर वृद्धि भारत की वैश्विक पहचान को सशक्त बना रही है।
खेलों के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है। भारोत्तोलन, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, निशानेबाजी, एथलेटिक्स तथा पैरा स्पोर्ट्स सहित अनेक खेलों में मिल रही सफलताएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत खेल महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राज्यपाल ने युवाओं से माय भारत मंच से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यह मंच स्वयंसेवा, नेतृत्व, नवाचार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, सामाजिक सेवा तथा राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से युवाओं को जोड़ रहा है।
उन्होंने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, मोबाइल एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे इन गांवों में प्रवास करें, वहां की विकास यात्रा को देखें, लोगों से सीखें और देश के विकास कार्यों को निकट से समझें।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प में निहित है। आज का भारत अवसरों, नवाचार और युवा शक्ति का भारत है। विद्यार्थी अपने लक्ष्य ऊंचे रखें और देश के प्रतिभाशाली युवाओं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें। अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाडों में भारतीय विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है। भौतिकी ओलंपियाड में भारत के पांच विद्यार्थियों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को प्रथम स्थान दिलाया। रसायन विज्ञान ओलंपियाड में सभी भारतीय प्रतिभागियों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए, जबकि जीव विज्ञान एवं गणित ओलंपियाड में भी भारतीय विद्यार्थियों ने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे वर्षों का परिश्रम, अनुशासन, जिज्ञासा और आत्मविश्वास है। विद्यार्थियों को इन सफलताओं से प्रेरणा लेकर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि प्रकृति हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की अपनी स्थानीय समस्याएं होती हैं और उनका स्थायी समाधान स्थानीय ज्ञान, संसाधनों और प्रतिभा के समन्वय से ही संभव है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का माध्यम बने। उन्होंने उन महिलाओं के कार्यों का उल्लेख किया, जो महाकुंभ के बाद बचे कपड़ों को एकत्रित कर उनसे उपयोगी वस्तुएं तैयार कर बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग के सहयोग से इन महिलाओं को प्रोत्साहन और विपणन की सुविधा मिल रही है। राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय समस्याओं को समझने के लिए उनके बीच जाना आवश्यक है, तभी प्रभावी समाधान निकलता है। उन्होंने यह भी बताया कि पढ़े-लिखे युवा भी इस अभियान से जुड़कर अपना सहयोग दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का शोध, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्थानीय चुनौतियों को अवसरों में बदल सकता है। वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कचरे को संसाधन में बदलकर एक ओर पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं ऐसे नवाचारों का अवलोकन करती हैं और उनका सहयोग भी करती हैं, क्योंकि राज्यपाल का दायित्व केवल दीक्षोत्सव में भाग लेना ही नहीं, बल्कि समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों को आगे बढ़ाना भी है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल, एक जनपद-एक उत्पाद, वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट, स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन तथा श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा मिलेट्स के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे खुशी का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय पर्व और त्योहार हमारी संस्कृति की आत्मा हैं। यदि इन अवसरों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों का उपयोग किया जाए, मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा की जाए तथा पर्यावरण-अनुकूल सामग्री अपनाई जाए, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय कुम्हारों, बुनकरों, शिल्पकारों और लघु उद्यमियों की आजीविका भी सशक्त होगी। उन्होंने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं के स्थान पर स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सत्यनिष्ठा, परिश्रम, अनुशासन और सेवा-भावना को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान, संस्कार और कर्म से परिवार, विश्वविद्यालय, समाज और राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राज्यपाल जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अभी भी डिजिलॉकर से अपनी उपाधियां एवं अंक पत्र डाउनलोड नहीं कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों के हित में लागू की गई है, इसलिए उन्हें हार्ड कॉपी देने के बजाय डिजिलॉकर के माध्यम से ही उपाधियां एवं अंकपत्र प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि सितंबर माह में आयोजित होने वाले एआई मंथन की तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी की जाएं तथा इसके सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन, विचारों और योगदान का गहन अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया जाए। इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय में संगोष्ठियां, निबंध, वाद-विवाद तथा अन्य शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएं, ताकि विद्यार्थी बाबा साहेब के जीवन, समाज और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को समझ सकें तथा उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाएं।
राज्यपाल ने माताओं को प्रेरित किया कि वे बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन के आवश्यक कार्य भी अवश्य सिखाएं, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। विश्वविद्यालय के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए राज्यपाल जी ने पुराने भवनों के जीर्णाेद्धार की सराहना की, वहीं निर्माणाधीन भवनों के लंबे समय से अधूरे रहने पर चिंता व्यक्त करते हुए इस संबंध में शीघ्र समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी राजकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की विस्तृत समीक्षा की थी, जिसमें अध्यापकों की संख्या, विद्यार्थियों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं तथा शैक्षणिक व्यवस्थाओं का आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि कई समीक्षा बैठकें तीन-तीन घंटे तक चलीं और एक दिन में दो बैठकों के माध्यम से लगभग छह घंटे तक विस्तार से चर्चा कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन कमियों की पहचान की गई थी, उन्हें दूर करने के लिए अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जाए।
राज्यपाल ने कहा कि नैक, एनआईआरएफ तथा वैश्विक रैंकिंग में विश्वविद्यालयों के बेहतर प्रदर्शन के कारण विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वविद्यालय के समग्र कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लगातार उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल कर रहा है और इसके लिए समस्त विश्वविद्यालय परिवार बधाई का पात्र है।
कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित एचपीवी टीकाकरण केंद्र का अवलोकन किया, जहाँ उन्होंने उपस्थित बालिकाओं एवं उनकी माताओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया तथा टीकाकरण करा चुकी बालिकाओं को स्वयं प्रमाण-पत्र, पोषण बास्केट एवं चॉकलेट वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर आगरा जनपद में सफलतापूर्वक संचालित एचपीवी टीकाकरण अभियान के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की।
समारोह के दौरान कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की अनेक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। लोकार्पित परियोजनाओं में विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल का जीर्णोद्धार, मियावाकी (निधिवन) परियोजना, चाणक्य सदन एवं अतिथि गृह का एकीकरण, सुल्तानगंज परिसर स्थित शताब्दी भवन (सेंटर फॉर लीगल एजुकेशन), कणाद हाई-टेक इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर, आंबेडकर प्रतिमा स्थल का नवीनीकरण तथा छलेसर परिसर में सुभाष चंद्र बोस मुख्य द्वार, लॉन टेनिस कोर्ट एवं सड़क निर्माण कार्य शामिल रहे। इसके साथ ही खंदारी परिसर स्थित आंबेडकर भवन तथा टीचर्स होम (12 आवास) के जीर्णोद्धार का शिलान्यास भी किया गया।
इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। एचडीएफसी बैंक के सीएसआर सहयोग, एचपीवी जागरूकता अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों तथा चार उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों का भी सम्मान किया गया। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं, खेलो इंडिया एवं नॉर्थ जोन प्रतियोगिताओं के स्वर्ण पदक विजेताओं को 1.05 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 50 हजार रुपये तथा कांस्य पदक विजेताओं को कुल 4.20 लाख रुपये की नकद धनराशि एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान जन भवन की ओर से एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य को पुस्तकें भेंट की गईं। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति जी ने भी जन भवन को पुस्तकों का सेट भेंट कर ज्ञान-विनिमय और पठन-पाठन को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों को उपाधि प्राप्ति पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, सतत प्रयास करने तथा नशामुक्त भारत अभियान सहित राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ज्ञान, संस्कार और नवाचार का संतुलित मॉडल प्रस्तुत करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनपर्यंत सीखते रहने, नवाचार अपनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक उपयोग करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए विभिन्न शैक्षणिक, शोध, नवाचार एवं विकासात्मक उपलब्धियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य, संकायाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, स्कूली बच्चे तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे

