Thursday, July 9, 2026
Uttar Pradesh

राज्यपाल की अध्यक्षता में हुआ CSJM यूनिवर्सिटी का 41वाँ दीक्षांत समारोह, 96 को मिले पदक

9 जुलाई, 2026 कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में छत्रपति शाहू महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर का 41वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों को कुल 10,7713 उपाधियां प्रदान की गईं। 51 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें 9 छात्र एवं 42 छात्राएं शामिल थीं। साथ ही 92 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 42 छात्र एवं 50 छात्राएं शामिल थीं।

दीक्षांत समारोह के अवसर पर कानपुर नगर के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 300 तथा कानपुर देहात के लिए 200, कुल 500 आंगनबाड़ी किटों का वितरण किया गया। साथ ही कुल 800 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया, जिनमें कानपुर नगर, कानपुर देहात तथा पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियां सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल पटेल ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने की पहल उन्होंने गुजरात से प्रारंभ की थी, जिसे अब उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 62 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा चुका है। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा निर्देश दिया कि अपने-अपने जनपदों में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को शत-प्रतिशत किट उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित कर उसे शीघ्र पूरा किया जाए।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत उन्होंने तीन वर्ष पूर्व की थी और अब तक लगभग 3 लाख बालिकाओं का निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण कराया जा चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब यह वैक्सीन बालिकाओं के लिए निःशुल्क उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने जनपदों में एक वर्ष के भीतर एचपीवी टीकाकरण का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कराया जाए।

अपने उद्बोधन में राज्यपाल पटेल ने सभी विद्यार्थियों को उपाधि प्राप्त करने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम से उन्हें भी बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस बात पर बल देती रही हैं कि विद्यालयों की प्रार्थना सभा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए, क्योंकि छोटे बच्चे बड़े बच्चों को देखकर सीखते हैं। उन्होंने कहा कि आज बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया है, जो अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित भी किया।

विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं पर प्रकाशित पुस्तकों की सराहना करते हुए राज्यपाल जी ने विशेष रूप से विद्यार्थियों की सुंदर हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) की प्रशंसा की। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों तथा जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में हस्तलेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं, उत्कृष्ट हस्तलेखन वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाए तथा जिन विद्यार्थियों का हस्तलेखन कमजोर है, उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर सुधारने का प्रयास किया जाए। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की पढ़ाई एवं लेखन शैली पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा कि सुंदर हस्तलेखन विद्यार्थियों के मूल्यांकन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

चित्रकला प्रतियोगिता पर आधारित पुस्तक की सराहना करते हुए राज्यपाल पटेल ने कहा कि बच्चों ने सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर अत्यंत उत्कृष्ट चित्र बनाए हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। भाषण प्रतियोगिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बालिकाओं ने उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। बचपन में विकसित होने वाले संस्कार एवं प्रतिभाएं ही भविष्य की सफलता का आधार बनती हैं। उन्होंने बेटियों के साथ-साथ बेटों की भी सभी प्रतियोगिताओं में समान भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।


राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का अधिकतम उपयोग करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी प्रतिदिन कम से कम एक घंटे अध्ययन करे तथा जो भी पढ़े, उस पर अपने विचार लिखे, चर्चा करे और दूसरों के साथ साझा करे। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को मोबाइल मेडिकल केयर वैन क्रय करने के निर्देश देते हुए कहा कि इसके माध्यम से गोद लिए गए गांवों के निवासियों एवं विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थियों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

राज्यपाल पटेल ने बताया कि जनभवन सचिवालय की टीम द्वारा उनके निर्देश पर विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में चिन्हित कमियों को शीघ्र दूर करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि परिसर स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित रखा जाए, अनावश्यक बिजली की खपत रोकी जाए, अग्नि सुरक्षा उपकरण सदैव क्रियाशील रहें, छात्रावासों में वाशिंग मशीन, शुद्ध पेयजल तथा कपड़े सुखाने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्विमिंग पूल एवं आर्चरी ग्राउंड का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने, मेस के भोजन को और अधिक पौषक बनाने तथा परिसर को पूर्णतः नशामुक्त बनाए रखने पर भी बल दिया। उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही पानी गिलास में ले, जितनी आवश्यकता हो।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों के भवनों की योजना एवं निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों के भवनों एवं छात्रावासों को स्वच्छ, सुंदर एवं सुविधासंपन्न बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि इस विषय पर प्रतियोगिता आयोजित की जाए तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को कुलाधिपति के द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि जिन विद्यार्थियों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी है, उन्हें कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देकर पुनः मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाए। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों में गर्भ संस्कार विषयक पाठ्यक्रम विकसित कर विद्यार्थियों को जागरूक करने तथा अशिक्षित महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के दीक्षांत समारोह के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, नवाचार एवं गुणवत्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्वविद्यालय को अपनी उपलब्धियों का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए, जिससे भविष्य की विकास यात्रा और अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। विद्यार्थियों से उन्होंने अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया तथा विश्वविद्यालय परिवार की टीम भावना की सराहना की।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए उपाधियां डिजिटल लॉकर पर उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि अपलोड की गई उपाधियों एवं विद्यार्थियों द्वारा डाउनलोड की गई डिग्रियों का नियमित आकलन किया जाए तथा विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

उन्होंने विश्वविद्यालय एवं अभिभावकों को प्रेरित किया कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता के साथ-साथ पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य, परिवार प्रबंधन तथा जीवनोपयोगी कौशलों का भी प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। समाज में बढ़ती आपराधिक एवं सामाजिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल पटेल ने अभिभावकों से बच्चों, विशेषकर बेटियों, को जागरूक एवं सजग बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में सही संस्कार, आत्मविश्वास एवं सतर्कता का विकास समय की आवश्यकता है।

दिव्यांग बच्चों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल पटेल ने गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं समय पर आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षणों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे सीएसआर के माध्यम से आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग करें, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और बेहतर बनाया जा सके।
उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि जिस महान विभूति के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित है, उनके जीवन, विचारों एवं समाज के प्रति योगदान पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता का सम्मान करने, उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने, समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने तथा विशेष रूप से बेटियों को आत्मनिर्भर, शिक्षित एवं समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह से पूर्व, राज्यपाल पटेल ने प्रेक्षागृह की लॉबी में आयोजित स्टार्टअप एक्सपो का अवलोकन एवं पांच परियोजनाओं का लोकार्पण तथा विश्वविद्यालय परिसर में विकसित होने वाली 10 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। समारोह में परंपरागत कच्छ चर्म शिल्प के विशिष्ट शिल्पाचार्य, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षणकर्ता एवं उद्यमी अंचल पी. बिजलानी को मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया गया।
राज्यपाल जी ने ऑनलाइन माध्यम से सस्टेनेबिलिटी डैशबोर्ड तथा नेवर अलोन ऐप का शुभारंभ किया। उन्होंने अध्यापन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया तथा विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित एवं संपादित पुस्तकों का विमोचन भी किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए चयनित पांच ग्रामों के विद्यालयों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। साथ ही विभिन्न संस्थाओं एवं विद्यार्थियों को इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड प्रदान किए।


इस अवसर पर 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता के रजत पदक विजेता, खेलो इंडिया गेम्स के कांस्य पदक विजेताओं तथा ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल पटेल ने जन भवन की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के लिए पुस्तकें भी भेंट कीं।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि सफल विद्यार्थियों ने अपने परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया है। विद्यार्थियों के परिश्रम जितना ही महत्व उनके माता-पिता के त्याग और बलिदान का भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और देश के लिए आदर्श बनने, अवसर को उपलब्धि में बदलने तथा विकसित भारत की संकल्पना में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि चुनौतियों से कभी हारना अथवा घबराना नहीं चाहिए। सभी विद्यार्थी समाज और राष्ट्र की अपेक्षाओं पर खरे उतरें, परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष, ए0आई0सी0टी0ई0 तथा कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रो.योगेश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करने के बाद छात्र अपने ज्ञान से विकसित भारत का सुनहरा अध्याय लिखना प्रारंभ करें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्रति कुलपति, कुलसचिव, विश्वविद्यालय की कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य, जिला प्रशासन के अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।