Saturday, August 15, 2026
Uttar Pradesh

CSJM यूनिवर्सिटी में “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” का हुआ आयोजन

14 अगस्त, 2026 कानपुर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लाखों विस्थापितों तथा इस दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिभा शुक्ला रहीं। विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह तथा मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद उन्होंने राजकीय अभिलेखागार द्वारा संरक्षित दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें विभाजन के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों की पीड़ा, पलायन के दौरान झेली गई कठिनाइयों और उनके संघर्ष को मार्मिक ढंग से दर्शाया गया।

प्रदर्शनी में देश के विभाजन में मुस्लिम लीग और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की भूमिका से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों के साथ नोआखली तथा कलकत्ता में भड़के सांप्रदायिक दंगों की विभीषिका को प्रदर्शित किया गया। दंगों का दर्द झेलने वाले परिवारों की त्रासदी, घर-बार छोड़कर पलायन करते शरणार्थियों की बेबसी तथा तत्कालीन प्रेस में प्रकाशित हृदयविदारक तस्वीरों ने विभाजन के अनेक अनकहे दर्द को जीवंत कर दिया। दुर्लभ चित्रों के माध्यम से सामने आई मानवीय पीड़ा ने प्रदर्शनी का अवलोकन करने वालों को भावुक कर दिया। इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। वर्ष 1947 का ऐतिहासिक विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी विस्थापन त्रासदियों में से एक था। इस दौरान करीब छह मिलियन यानी 60 लाख गैर-मुस्लिम आबादी को अपना घर-बार छोड़कर भारत आना पड़ा। पलायन की इस पीड़ादायक यात्रा में लोगों ने अनगिनत कठिनाइयां और अमानवीय अत्याचार झेले। करीब पांच लाख लोगों ने इस विभीषिका में अपना जीवन गंवा दिया। यह केवल देश की सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि असंख्य परिवारों, रिश्तों और स्मृतियों के बिखरने की त्रासदी थी।

मुख्य अतिथि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि विभाजन का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। देश का विभाजन केवल भूभाग का बंटवारा नहीं था। उसने असंख्य परिवारों को उनकी जड़ों, घरों और अपनों से अलग कर दिया। विभाजन की पीड़ा सहने वाले लोगों का संघर्ष और धैर्य देश के लिए प्रेरणा है। इतिहास के इस पीड़ादायक अध्याय से सीख लेते हुए सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना होगा।

विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी में लाखों लोगों ने असहनीय कष्ट झेले। उनके त्याग, संघर्ष और साहस को स्मरण करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि नई पीढ़ी को विभाजन की वास्तविकता और उससे जुड़ी मानवीय पीड़ा से परिचित कराना आवश्यक है, जिससे इतिहास से सीख लेते हुए सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ किया जा सके। विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने अपना सब कुछ खोने के बाद भी नए भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभाजन की विभीषिका हमारे इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। नई पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत होना चाहिए और समाज को सदैव सजग रहना चाहिए। ऐसी त्रासदी दोबारा न हो और इतिहास स्वयं को न दोहराए। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को स्मरण करने का उद्देश्य केवल अतीत की पीड़ा को याद करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आपसी सद्भाव, संवेदनशीलता और एकता के मूल्यों को मजबूत करना भी है।

कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका से प्रभावित विस्थापित परिवार से जुड़े महेश मेघानी ने अपने अनुभव और परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि विभाजन के दौरान उनके परिवार ने असंख्य कठिनाइयां झेलीं। अपना घर-बार छोड़ने के बाद परिवार ने परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर भारत में स्वयं को नए सिरे से स्थापित किया। आज विस्थापित परिवारों के सदस्य देश की प्रगति में बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं।

सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड ने कहा कि भारत का विभाजन इतिहास की अत्यंत दुखद घटना थी। इस त्रासदी में लाखों परिवारों ने अपने घर, संपत्ति और अपनों को खोया तथा असंख्य कष्ट सहे। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विस्थापित परिवारों ने हार नहीं मानी और कठिन परिश्रम से अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया।

कार्यक्रम में विभाजन की विभीषिका से प्रभावित परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि एवं जनप्रतिनिधियों ने सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड, बाबा मोहन सिंह, गुरमीत सिंह, महेश मेघानी, लक्ष्मण दास अमरनानी, नरेश टेकवानी, दिलीप बालानी, कुलदीप पारवानी, मनोहर शादीजा, खूबचंद खट्टर और किसन जागरणी सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया। इस दौरान प्रभावित परिवारों के संघर्ष, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा करने के उनके साहस को नमन किया गया।