Sunday, November 1, 2026
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भारत के डीएनए में हैं लोकतंत्र, सत्ता परिवर्तन का एकमात्र रास्ता चुनाव- प्रल्हाद जोशी

31 अक्टूबर, 2026 जयपुर। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का एकमात्र संवैधानिक और लोकतांत्रिक रास्ता चुनाव है। राहुल गांधी और उनके साथ रहने वाले कुछ लोग खुले तौर पर ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी बांग्लादेश के युवाओं से प्रेरणा लेने और वहां हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हैं। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि वे किस प्रकार के सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं? बांग्लादेश में हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन हुआ और आज वहां हिंदुओं पर अत्याचार तथा हत्याओं की घटनाएं सामने आ रही हैं। क्या कांग्रेस भारत में भी ऐसी परिस्थितियां चाहती है? भारत का लोकतंत्र हमारे डीएनए में, हमारी परंपरा और संस्कारों में रचा-बसा है। देश की जनता अपने मताधिकार से सरकार चुनने में पूरी तरह सक्षम है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश में एसआईआर अब तक 12 बार हो चुका है,उसमें से 10 बार कांग्रेस का शासनकाल था। पहले कांग्रेस को इस पर कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन आज राजनीतिक हताशा में राहुल गांधी और उनकी पार्टी इसका विरोध कर रही है। एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण, अनुपस्थिति और दोहरी प्रविष्टियों के कारण मतदाता सूची में कई नाम बने रहते हैं। लगभग 13 करोड़ नामों को लेकर उठाए जा रहे सवालों में करीब 2 करोड़ 80 लाख मृत मतदाताओं, लगभग 6.3 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों और करीब 3 करोड़ अनुपस्थित अथवा लापता मतदाताओं का उल्लेख किया गया है। जो लोग संबंधित पते पर रहते ही नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची में बनाए रखना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूट गया है तो वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकता है। राजस्थान में भी लगभग 13 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मांग करते है कि मतदाता सूची एसआईआर से पहले की तरह रखी जाए, ये मांग उनकी बेवकूफियों की पराकाष्ठा है। जिन लोगों का निधन हो गया है, उनका नाम वे रखना चाहते है तो पहले वे जहां चले गए है, उन्हें लेकर आए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भारतीय मतदाता नकार चुका है, इसलिए वो चाहती है घुसपैठियोंका नाम पहले मतदाता सूची में जुड़वा दिया जाए और उन्हें सारी सुविधाएं देने के बहाने सत्ता में आ जाए।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में चार सीटों पर चुनाव हुए, वहां सरकार ने सरकारी मशीनरी का उपयोग करने के बावजूद कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। देशभर में 28 सीटों के परिणामों में कांग्रेस सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल कर पाई है, जबकि ये सभी चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे। इन चुनावों में भाजपा ने 15 सीटें जीती है। इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव हारने के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। त्रिपुरा और असम सहित विभिन्न राज्यों में स्थानीय निकायों के चुनाव बैलेट पेपर से हुए, वहां भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी विफलता स्वीकार करने के बजाय न्यायपालिका, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति और भारत निर्वाचन आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। जब न्यायालय का फैसला कांग्रेस के पक्ष में आता है तो उसे न्यायपालिका अच्छी लगती है, लेकिन फैसला खिलाफ आने पर वही न्यायिक व्यवस्था उसे गलत लगने लगती है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि क्या उसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर वास्तव में विश्वास है? जोशी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास में झांकना चाहिए। नवीन चावला की निर्वाचन आयोग में नियुक्ति को लेकर तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद नवीन चावला आगे चलकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। एम.एस. गिल मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहने के बाद कांग्रेस सरकार में मंत्री बने। टी.एन. शेषन ने भी बाद में राजनीति में प्रवेश किया और गांधीनगर से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आपातकाल का इतिहास भी याद करना चाहिए, जब तत्कालीन सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ किया और न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए अपनी पसंद के न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीक के उपयोग से प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस अब देश की आर्थिक प्रगति को भी निशाना बना रही है। जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं, तब भारत लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत ने पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और मूडीज जैसी संस्थाओं के अनुमान भी भारत की मजबूत आर्थिक संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 260 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या बढ़कर 2 लाख 40 हजार से अधिक हो गई है। इन स्टार्टअप्स ने 20 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत हो रहा है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के साथ देश के 140 करोड़ नागरिकों के परिश्रम और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों को बताना चाहिए कि नवरात्रि और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के समय ही उन्हें विरोध-प्रदर्शन करने की आवश्यकता क्यों महसूस होती है? कांग्रेस के हाल ही में किए गए प्रदर्शन से व्यापारियों को करीबन 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारी सीजन में ऐसे प्रदर्शन करके व्यापारियों की आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना कहां तक उचित है? विपक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि दूसरों को लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुचिता का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस नेताओं को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी देश की नागरिकता बनने से पहले मतदाता बन गई थी, इतना ही नहीं राजस्थान में कांग्रेस के विधायक के बेटे जयप्रकाश द्वारा दो स्थानों पर मतदाता बनने तथा कोर्ट का फर्जी आदेश बनाने तक का मामला सामने आया है। कांग्रेस को पहले अपने नेताओं के आचरण पर जवाब देना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब बार-बार लॉन्च और रिलॉन्च करने तक सीमित रह गई है। राहुल गांधी को कई बार लॉन्च किया गया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। कांग्रेस के भीतर भी अब यह चर्चा होने लगी है कि आखिर एक असफल राजनीतिक प्रोडक्ट को कितनी बार लॉन्च किया जाएगा? उन्होंने कहा कि संगठन के लिए लगातार काम करना पड़ता है, लेकिन राहुल गांधी का कार्यक्रम केवल दो—चार दिनों का ही रहता है। इसके बाद वे कभी वियतनाम तो कभी अन्य देश में चले जाते है। ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जोशी ने कहा कि राहुल गांधी भारत के लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर विदेशी देशों से सहायता मांगने की बात करते हैं। भारत के आंतरिक लोकतांत्रिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की बात करना उचित नहीं है। भारत की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के माध्यम से अपनी सरकार चुनने में पूरी तरह सक्षम है। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और जनता के निर्णय को स्वीकार करना प्रत्येक राजनीतिक दल का दायित्व है। चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जाकर परिश्रम करना चाहिए, न कि हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना चाहिए। भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान देश की जनता को जागरूक करने का प्रयास है। लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और देश की एकता-अखंडता को मजबूत बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जोशी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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