Sunday, September 20, 2026
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अंडमान-निकोबार में पर्यटन को दी जाएगी नई दिशा – डॉ दिनेश शर्मा

19 सितंबर, 2026 लखनऊ। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि अंडमान को पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक एवं सुरक्षित बनाने के लिए विजन डाक्यूमेन्ट तैयार किया जाएगा। इसमें प्राकृतिक उपायों के साथ ही एआई के प्रयोग पर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों से राय ली जाएगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में इंस्टिट्यूट ऑफ़ हाइड्रोकार्बन एनर्जी एंड जीयो रिसोर्सेस के तत्वाधान में अंडमान-निकोबार में जलवायु परिवर्तन पर आयोजित परिचर्चा में उपराज्यपाल ने कहा कि अंडमान पर्यटन की दृष्टि से काफी अहम है। समुद्र के बीच में स्थित 836 द्वीपों के समूह में पर्यटकों को आकर्षित करने की असीम संभावनाए मौजूद हैं।  अब यहां के पर्यटन को नई दिशा प्रदान करने का समय आ गया है। इसके लिए वहां  पर आने वाली  प्राकृतिक आपदा  की चुनौतियों से बचाव के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। इससे वहां पर आने वाले पयर्टक और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा बढेगी। प्राकृतिक सौन्दर्य को बनाए रखते हुए ही पर्यटकों के लिए नए आकर्षण के केन्द्र तैयार किए जाएंगे।   

उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की कार्यशालाओं का आयोजन श्रंखलाबद्ध तरह से किया जाएगा तथा इस मंथन से निकलने वाले बिन्दुओं को विजन डाक्यूमेन्ट में शामिल किया जाएगा। उनका कहना था कि पर्यावरणीय बदलावों  और तापमान में करीब डेढ डिग्री की वृद्धि के चलते तमाम तरह की चुनौतियां  सामने आ रही है। समुद्री जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है जिसके चलते निचले तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले उन  मैंग्रोव वनों के लिए भी खतरा  पैदा हो रहा है जो समुद्र तटों की कटाव से रक्षा के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। 

उपराज्यपाल डॉ शर्मा ने कहा कि द्वीप समूह के बैरन द्वीप में भारत का एकमात्र एक्टिव ज्वालामुखी मौजूद है। यहाँ पर पर्यटको को जाने की अनुमति नहीं है पर इसमें होने वाली गतिविधियों के कारण निकलने वाली हानिकारक गैस आदि का समीप के  समुद्री जीवन पर प्रभाव न पड़ें यह पहले से सोचना होगा। सुनामी और भूकम्प की चर्चा करते हुए भूगर्भ शास्त्रियों एवं वैज्ञानिकों ने कहा कि इनसे बचाव के उपायों को और सटीक करने की आवश्यकता है। समुद्री क्षेत्र होने के कारण भूमिगत जल भी खारा होने की समस्या बनी रहती है। समुद्र से घिरे होने के कारण उमस बहुत अधिक रहती है।  
उपराज्यपाल डॉ शर्मा ने कहा आने वाले समय में यहाँ पर चिकित्सा सुविधाओं में बढोत्तरी की जाएगी।

परिचर्चा में उपस्थित वैज्ञानिकों ने अंडमान- निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक परिस्थिति चलते आ रही चुनौतियों को रेखांकित करते हुए समाधान के सुझाव प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोo जेपी सैनी, जंतु विज्ञान विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉo अमिता कनौजिया, वरिष्ठ आचार्य एवं कार्यक्रम संयोजक भूविज्ञान डॉo ध्रुव सेन सिंह, अधीक्षक निर्माण विभाग प्रोफेसर विनीत वर्मा, प्रोफेसर पुनीत वर्मा, प्रोफेसर मनीषा बनर्जी, प्रोफेसर सीआर गौतम, आदि उपस्थित रहे।

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