IIT कानपुर में जैव विविधता संरक्षण पर हुआ विशेष व्याख्यान का आयोजन
12 अगस्त, 2026 कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी (KSS) में “तमिलनाडु की कहानी: जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलापन का एक सफल मॉडल” विषय पर स्वस्तिभवतु विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। यह व्याख्यान रावत फैमिली ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित स्वस्तिभवतु विशिष्ट व्याख्यान श्रृंखला का हिस्सा है।
इस व्याख्यान में तमिलनाडु सरकार के उद्यमिता विकास एवं नवाचार संस्थान की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं आयुक्त, सुश्री सुप्रिया साहू (आईएएस) ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जीवन, वन्यजीव संरक्षण, आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किस प्रकार प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल अच्छी नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए विज्ञान, तकनीक, सुशासन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न क्षेत्रों के आपसी सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पर्यावरण संरक्षण और लोगों की आजीविका को साथ लेकर चलना ही सतत विकास का सबसे प्रभावी तरीका है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक, समुदायों की सक्रिय भागीदारी और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से ऐसे मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो जैव विविधता की रक्षा करने के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं को भी पूरा करें और बड़े स्तर पर अपनाए जा सकें।
इस अवसर पर सुश्री सुप्रिया साहू, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं आयुक्त, उद्यमिता विकास एवं नवाचार संस्थान, तमिलनाडु सरकार ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण तभी सार्थक होता है जब नीतियों का लाभ लोगों और प्रकृति दोनों तक पहुंचे। तमिलनाडु के अनुभव ने हमें सिखाया है कि संरक्षण को लोगों की आजीविका, स्थानीय समुदायों और विकास से अलग नहीं किया जा सकता। विज्ञान, तकनीक, सुशासन और जनभागीदारी को साथ लेकर हम ऐसे मॉडल बना सकते हैं जो प्रकृति की रक्षा करें और समाज को अधिक सक्षम एवं सुरक्षित बनाएं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन सफल प्रयासों को बड़े स्तर पर लागू करना है।”
इस अवसर पर प्रो. सच्चिदा नंद त्रिपाठी, डीन, कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी, आईआईटी कानपुर ने कहा, “तमिलनाडु का अनुभव बताता है कि सतत विकास केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना सबसे महत्वपूर्ण है। विज्ञान और तकनीक के साथ मजबूत संस्थागत व्यवस्था, नई नीतियां और समुदायों की सक्रिय भागीदारी ही बड़े स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान कर सकती है। कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी में हम विज्ञान, नीति और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को एक साथ जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो स्थानीय स्तर पर उपयोगी होने के साथ वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकें।”
सार्वजनिक प्रशासन और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक के अनुभव वाली सुश्री सुप्रिया साहू भारत की पहली राज्य स्तरीय जलवायु कंपनी तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी की प्रमुख योजनाकार हैं। वर्ष 2025 में उन्हें जलवायु फ्लेक्सिबिलिटी और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के “चैम्पियंस ऑफ द अर्थ” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस व्याख्यान ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण और सतत विकास जैसी जटिल चुनौतियों का समाधान केवल एक क्षेत्र के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए विज्ञान, सार्वजनिक नीति, तकनीक और समाज के अनुभवों को साथ लेकर काम करना आवश्यक है। यही सोच स्वस्तिभवतु विशिष्ट व्याख्यान श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य भी है।
स्वस्तिभवतु विशिष्ट व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से पर्यावरण, विकास, तकनीक और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों को एक मंच पर लाया जाता है। इस श्रृंखला का उद्देश्य ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना और सतत एवं मजबूत भविष्य के लिए बहु-विषयक सोच को प्रोत्साहित करना है।
इस श्रृंखला में इससे पहले पद्मश्री प्रो. टी. प्रदीप, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के दिवंगत प्रो. वी. रामास्वामी, पद्मश्री प्रो. अशोक गुलाटी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ व्याख्यान दे चुके हैं।
आईआईटी कानपुर का कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी (KSS), कोटक महिंद्रा समूह के सहयोग से स्थापित एक बहु-विषयक संस्थान है, जो सतत विकास से जुड़े शोध, नवाचार और शिक्षा को बढ़ावा देता है। यह संस्थान जलवायु, ऊर्जा, जल और शहरी विकास जैसी प्रमुख चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान, तकनीक और नीतिगत शोध को एक साथ जोड़कर कार्य करता है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रभावी समाधान विकसित करना और भविष्य के ऐसे नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करना है, जो अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और लचीले समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

