Tuesday, July 7, 2026
Uttar Pradesh

एकेटियू के 24वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुई राज्यपाल पटेल, 55 को पीएचडी और 84 को मिले पदक

7 जुलाई, 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ का 24वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह में कुल 62,537 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही 55 विद्यार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि तथा 84 पदक प्रदान किए गए। पदक विजेताओं में 52 छात्राओं तथा 31 छात्रों को सम्मानित किया गया। सभी उपाधियों एवं प्रमाणपत्रों को डिजीलाकर पर उपलब्ध कराया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल पटेल ने जनपद सीतापुर के 340 आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने के लिए आंगनबाड़ी किट वितरित कीं। इस अवसर पर जनपद लखनऊ की 500 एवं जनपद सीतापुर की 435 सहित कुल 935 बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई।

विश्वविद्यालय द्वारा राजकीय बालगृह (बालिका) सिंधीखेड़ा में स्थापित चार एसी तथा गोद लिए गए दो विद्यालयों में विकसित स्मार्ट क्लासों का भी राज्यपाल पटेल ने लोकार्पण किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल पटेल ने कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां नहीं, बल्कि परिश्रम, चरित्र और ऊंचे सपने व्यक्ति का भविष्य निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वाच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले डॉ. कलाम प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें स्वयं रामेश्वरम जाकर वह प्राथमिक विद्यालय देखने का अवसर मिला, जहां डॉ. कलाम ने शिक्षा ग्रहण की थी और बाद में अपनी प्रतिभा एवं वैज्ञानिक कौशल से पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि डॉ. कलाम का विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं था, बल्कि ज्ञान, नवाचार, नैतिकता, आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण भारत का निर्माण उनका लक्ष्य था। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें, कठिन परिश्रम करें और ज्ञान, विज्ञान, नवाचार तथा नैतिक मूल्यों के आधार पर भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान दें।

उन्होंने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां और पदक प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का उत्सव है। राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष उपाधियों एवं पदकों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक रही है, जो तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, उत्कृष्ट प्रदर्शन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। प्रतिभा का कोई लिंग नहीं होता और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। साथ ही उन्होंने छात्रों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि स्वयं को निरंतर बेहतर बनाना होना चाहिए।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि इस बार विश्वविद्यालय परिसर एवं राजकीय महाविद्यालयों की तुलना में निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को अधिक पदक एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कुलपति एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, मार्गदर्शन और संसाधनों पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि उन्हें भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के समान अवसर मिलें और भविष्य में वे भी अधिक संख्या में पदक एवं सम्मान प्राप्त कर सकें।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि नैक से ए-प्लस ग्रेड प्राप्त इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, इंफोसिस मेकर्स लैब, इनक्यूबेशन सेंटर, 100 करोड़ रुपये की इनोवेशन निधि, कलाम पेटेंट सेंटर के माध्यम से निःशुल्क पेटेंट सुविधा, भाभा टीचिंग असिस्टेंटशिप, स्पेस एवं क्वांटम टेक्नोलॉजी में माइनर डिग्री तथा फॉरेंसिक साइंसेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों की सराहना की।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में ऑनलाइन प्रश्नपत्र वितरण, ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन तथा सीसीटीवी आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शिता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय इन व्यवस्थाओं को अपनाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, गोद लिए गए विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरण तथा राजकीय बालगृह, बालिका सिंधी खेड़ा के विकास के लिए किए गए कार्यों की भी सराहना की।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें मानव जीवन को नई दिशा दे रही हैं। तकनीकी प्रगति के साथ भारतीय संस्कृति, भाषाओं और मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने इस संदर्भ में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा साइंस में बी.टेक. कार्यक्रम प्रारंभ करने की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण, भारतीय भाषाओं के संवर्धन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए करें। उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता बन रहा है और युवाओं को इस परिवर्तन का नेतृत्व करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय भाषाओं, संस्कृत तथा प्राचीन ग्रंथों एवं दुर्लभ पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनका संरक्षण किया जाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की अमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल पटेल ने भारतीय नौसेना में शामिल स्वदेशी युद्धपोतों, भारत में निर्मित सी-295 विमान, डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत की वैज्ञानिक क्षमता, इंजीनियरिंग कौशल और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला भारत सरकारों के निर्णयों से ही नहीं, बल्कि युवाओं के शोध, स्टार्टअप, नवाचार और कल्पनाशक्ति से निर्मित होगा।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के भविष्य की नई इबारत लिख रही है। प्रधानमंत्री द्वारा विशाखापट्टनम में गूगल एआई हब के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे एआई की पहुंच आम नागरिकों तक होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और अनुसंधान सहित सभी क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन आएगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ हरित विकास के क्षेत्र में भी देश निरंतर नई उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है। उन्होंने डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन, सौर ऊर्जा, एक पेड़ मां के नाम, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस तथा वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विश्व को नई दिशा दे रहा है।

राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्ञान को नवाचार से, नवाचार को राष्ट्र निर्माण से तथा राष्ट्र निर्माण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करें। जिस राष्ट्र के युवा नवाचार को अपना संकल्प बना लेते हैं, उस राष्ट्र के भविष्य को कोई शक्ति रोक नहीं सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

राज्यपाल पटेल ने मुख्य अतिथि एवं इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में उनके दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार तथा राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति उल्लेखनीय योगदान ने उन्हें भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के अग्रणी नेतृत्वकर्ताओं में विशिष्ट स्थान दिलाया है।

राज्यपाल पटेल ने अपने गुजरात प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वाइब्रेंट गुजरात के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया। इस संबंध में तैयार पुस्तक को विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में उपलब्ध कराया गया, जिस पर विद्यार्थियों के बीच चर्चा होती थी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से युवाओं में जागरूकता बढ़ी और राज्य में निवेश को भी गति मिली।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप सभी भावी इंजीनियर हैं, इसलिए निर्माण कार्यों में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि उपयोगिता, गुणवत्ता और संवेदनशीलता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। विश्वविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्राथमिक विद्यालयों के भ्रमण के दौरान उन्हें अनेक भवनों के डिजाइन एवं निर्माण में व्यावहारिक कमियां दिखाई देती हैं। भवनों का डिजाइन वहां की आवश्यकता तथा उनका उपयोग करने वाले बच्चों की आयु एवं जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। विशेष रूप से आंगनबाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालयों में छोटे बच्चों के अनुरूप शौचालय सहित सभी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए तथा निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की विसंगति नहीं होनी चाहिए।

राज्यपाल पटेल ने छात्रावासों के निर्माण एवं संचालन में भी गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि निर्माण के समय सभी आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में प्रस्तावित नए छात्रावास के निर्माण में आधुनिक रसोई, स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण, विद्यार्थियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं, पौष्टिक भोजन, दिव्यांगजन के लिए सुगम आवागमन (रैम्प) तथा गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट बोर्ड के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षाओं का निर्माण एवं संचालन किया जाए तथा कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या भी निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि नए निर्माण कार्यों में पानी, बिजली एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ओपन जिम का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरों को क्रियाशील रखने तथा विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे सामाजिक कुरीतियों एवं बुराइयों से दूर रहकर पूरी निष्ठा के साथ अध्ययन करें, अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास करें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए विद्यालयों एवं राजकीय बालगृह (बालिका), सिंधीखेड़ा के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनकी राज्यपाल ने सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए विद्यालयों की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों, एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम में योगदान देने वाले अधिकारियों तथा गोद लिए गए विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पाँच श्रेणियों में स्टूडेंट स्टार्टअप अवार्ड प्रदान किए। इस अवसर पर रोगन कला के प्रख्यात कलाकार आशीष शांतिलाल कंसारा को डी.लिट्. (मानद) उपाधि से सम्मानित किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में सहजन का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।