राज्यपाल की अध्यक्षता में हुआ एचबीटीयू का अष्टम दीक्षांत समारोह, 47 को मिले पदक
10 जुलाई, 2026 कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर का अष्टम दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को 1,071 उपाधियां एवं 47 पदक प्रदान किए। पदक प्राप्त करने वालों में 28 छात्र एवं 19 छात्राएं शामिल रहीं।
जनपद उन्नाव के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किटें वितरित की गईं तथा पुलिस लाइन में तैनात पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल पटेल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में छात्राओं की अपेक्षाकृत कम भागीदारी चिंतन का विषय है। आज महिलाएं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, इसलिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी उनकी समान एवं सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, परिश्रम और प्रतिभा के बल पर तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित कर देश का गौरव बढ़ाएं।

दीक्षांत समारोह में सभी उपाधियां एवं अंकपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराए गए। इस दौरान राज्यपाल ने डिजिलॉकर के अपेक्षाकृत कम उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों द्वारा इस सुविधा के सीमित उपयोग के कारणों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से डिजिलॉकर जैसी डिजिटल सुविधा का अधिकाधिक उपयोग करने की अपील की। साथ ही शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान डिजिलॉकर पर अपलोड की गई उपाधियों एवं अंकपत्रों की घटती संख्या पर भी चिंता व्यक्त करते हुए परीक्षा नियंत्रक से इसका कारण मांगा।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्तमान युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, डेटा विज्ञान, हरित ऊर्जा एवं डिजिटल नवाचार का युग है। ऐसे समय में तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं का दायित्व केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान खोजते हुए राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान देना भी है। उन्होंने कहा कि अमृतकाल में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के बल पर विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर तीव्र गति से अग्रसर है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों में सुशासन, पारदर्शिता और जनसशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। डिजिटल भुगतान, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) तथा तकनीक आधारित सेवाओं ने शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि एवं अन्य जनसेवाओं में डिजिटल तकनीक ने नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नई तकनीकों का सृजन करने वाला राष्ट्र बन रहा है। भारतीय नौसेना में शामिल स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक एवं आईएनएस अग्रय, मेड इन इंडिया सी-295 विमान तथा डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और नवाचार का प्रतीक हैं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब किसी राष्ट्र के पास तकनीक, नवाचार और राष्ट्रभावना का समन्वय होता है, तब वह केवल विकास ही नहीं करता, बल्कि इतिहास भी रचता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का युवा इसी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन और मेक इन इंडिया जैसी पहलें युवाओं में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित कर रही हैं। यह परिवर्तन अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी डिजिटल तकनीक, आधुनिक कृषि, ग्रामीण स्टार्टअप और स्थानीय उद्यमिता के माध्यम से नवाचार की नई चेतना विकसित हो रही है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों, प्रयोगशालाओं और युवाओं के सपनों में निहित है। इसी सोच के अनुरूप अटल टिंकरिंग लैब्स, भारतनेट परियोजना, डीप टेक फंड ऑफ फंड्स तथा आईआईटी एवं आईआईएससी में अनुसंधान फेलोशिप जैसी पहलें युवाओं में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नई तकनीक विकसित करने वाले और विकसित भारत के निर्माता बनें। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीक का उद्देश्य केवल मशीनों का ज्ञान नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान और मानवता का कल्याण है। जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, नवाचार तथा चुनौतियों को अवसर में बदलने का साहस ही सफलता का वास्तविक आधार है और शिक्षा जीवन को दिशा एवं उद्देश्य प्रदान करती है।
राज्यपाल पटेल ने जन भवन की टीम द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के निरीक्षण में चिन्हित कमियों को एक से दो माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन छात्रावास में वॉशिंग एरिया, रसोईघर, स्टोर, किचन प्लेटफॉर्म, आरओ, वॉशिंग मशीन एवं कपड़े सुखाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ विद्युत आपूर्ति की समस्या को 15 दिनों के भीतर दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने बालिका छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, आरओ स्थापित करने तथा आरओ से निकलने वाले अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था विकसित करने पर भी विशेष बल दिया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों का निरीक्षण किया है और अनेक स्थानों पर भवनों के डिजाइन एवं उपयोगिता संबंधी कमियां देखने को मिली हैं। उन्होंने तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य के अभियंता के रूप में उन्हें भवनों एवं अन्य संरचनाओं की योजना बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उनका उपयोग कौन करेगा तथा उपयोगकर्ताओं की आयु, आवश्यकता और सुविधा के अनुरूप ही डिजाइन तैयार किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालय, विश्वविद्यालय, पुस्तकालय एवं छात्रावास जैसे प्रत्येक संस्थान की संरचना उसकी उपयोगिता के अनुरूप होनी चाहिए। कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड की उपयुक्त ऊंचाई, पुस्तकालय का सुविधाजनक स्थान तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी परियोजना के निर्माण में समग्र योजना अत्यंत आवश्यक है। सड़क निर्माण के बाद बार-बार जलापूर्ति, विद्युत अथवा इंटरनेट लाइनों के लिए खुदाई सार्वजनिक धन और संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी का कारण बनती है। इसलिए अभियंताओं को दीर्घकालिक दृष्टि के साथ समन्वित एवं उपयोगकर्ता-केंद्रित योजना बनानी चाहिए।
राज्यपाल पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अहमदाबाद के नगर विकास में दूरदर्शी योजना, टाउन प्लानिंग, ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार तथा नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष बल दिया। उनके प्रयासों से नगर के सुनियोजित विस्तार की आधारशिला रखी गई तथा 21 एकड़ भूमि पर विकसित वी.एस. अस्पताल जैसी जनोपयोगी संस्थाओं की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो आज एक विशाल चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की शताब्दी-दृष्टि से प्रेरणा लेकर अभियंताओं को भी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ निर्माण कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कुलपति एवं शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे स्वयं नियमित रूप से परिसर का निरीक्षण करें, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करें तथा अधोसंरचना के विकास में गुणवत्ता और उपयोगिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने विद्यार्थियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे जिस भी पद पर कार्य करें, गुणवत्ता, समयबद्धता, ईमानदारी और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करेंगे तथा अपने माता-पिता के परिश्रम और त्याग का सदैव सम्मान करेंगे।
समारोह में स्कूली बच्चों ने अभिनय सहित पर्यावरण तथा देशभक्ति गीत की आकर्षक प्रस्तुति दी। राज्यपाल पटेल ने सभी बच्चों को सम्मानित कर उपहार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। साथ ही विश्वविद्यालय के नवीन भवनों का लोकार्पण एवं विद्यार्थियों हेतु वाहन सेवा का शुभारंभ किया।
राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सम्मानित किया। उन्होंने जनपद उन्नाव के जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। प्राथमिक विद्यालयों के पुरस्कार विजेता विद्यार्थियों के शिक्षकों को पुस्तकें भेंट की गईं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के लिए 100 कलरिंग पुस्तकों का सेट भी राज्यपाल जीको भेंट किया गया।
मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष एफ0डी0डी0आई0 राजेन्द्र कुमार जालान ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्व-नेतृत्व की क्षमता विकसित करने, चुनौतियों से न घबराने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल से विश्वविद्यालय एवं देश का नाम रोशन करें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर समशेर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, प्राविधिक शिक्षा डॉ. एम.के.एस. सुंदरम, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिष्ठाता (शैक्षिक क्रियाकलाप), कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्यगण, जिला प्रशासन के अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, स्कूली बच्चे तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

