CS ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति संग की बैठक
19 मार्च, 2026 लखनऊ। मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार, वित्तीय समावेशन को गति देने तथा आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान करने पर व्यापक चर्चा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र को और अधिक सक्षम, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाए, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग तक बैंकिंग सुविधाएं प्रभावी ढंग से पहुंच सकें। उन्होंने बैंकों से अपेक्षा की कि वे वित्तीय समावेशन को केवल एक लक्ष्य न मानकर इसे जन-जन तक पहुंचाने का अभियान बनाएं।
उन्होंने कहा कि सतत वित्तीय विकास सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ानी होगी तथा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रदेश में हाल ही में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन (ओडीओसी) योजना के तहत स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए बैंकों को उद्यमियों को त्वरित ऋण उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे यह पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
कृषि प्रधान राज्य होने के कारण मुख्य सचिव ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया और कहा कि किसानों को सुलभ ऋण सुविधा उपलब्ध कराना बैंकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी बैंक सीएम युवा, ओडीओपी, पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी प्रमुख योजनाओं में अपने कवरेज को बढ़ाएं तथा लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता पहुंचाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक विकास के बावजूद कई उद्योगों के बैंक खाते अन्य राज्यों में संचालित हो रहे हैं, जिससे प्रदेश के सीडी रेशियो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि उद्यमियों को एलओसी जारी करते समय उनके ऋण खाते प्रदेश के भीतर ही किसी शाखा में खुलवाएं जाएं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र की ऋण योजनाओं से संबंधित फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित या अस्वीकृत न किया जाए और पात्र लाभार्थियों को शीघ्र ऋण स्वीकृति प्रदान की जाए। मुख्य सचिव ने डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए बैंकों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आम जनता को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष बल दिया।
उन्होंने सभी बैंकिंग अधिकारियों से अपेक्षा की कि प्रदेश के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करें। वित्तीय समावेशन, उद्यमिता विकास और कृषि सशक्तिकरण के माध्यम से प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएं।
बैठक में बैंक ऑफ बड़ौदा के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर लाल सिंह ने वर्ष 2026-27 के केंद्रीय एवं राज्य बजट को समावेशी विकास, रोजगार सृजन और अवसंरचना विस्तार के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय में वृद्धि सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह बैंकिंग क्षेत्र के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकसित भारत 2027 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग क्षेत्र के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन एक दूरदर्शी कदम है, जिससे वित्तीय सेवाओं का विस्तार और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे केवल ऋण वितरण तक सीमित न रहें, बल्कि ‘क्रेडिट प्लस’ दृष्टिकोण अपनाते हुए ऋण के प्रभावी उपयोग और उसके परिणामों पर भी ध्यान दें। एमएसएमई, स्टार्टअप, कृषि और स्वरोजगार के क्षेत्रों में वित्तीय सहायता के साथ-साथ मार्गदर्शन और निगरानी की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए, ताकि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सके। साथ ही, डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए बैंकिंग सेवाओं को और अधिक विश्वसनीय बनाया जाए।
बैठक में भारतीय रिज़र्व बैंक, लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक पंकज कुमार, नाबार्ड लखनऊ के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार, महाप्रबंधक एवं संयोजक एसएलबीसी (उ.प्र.) शैलेन्द्र कुमार सिंह तथा उपमहाप्रबंधक एसएलबीसी (उ.प्र.) श्रीमती निधि कुमार सहित सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

