Thursday, February 5, 2026
Uttar Pradesh

विकास कार्य धरातल पर नजर आने चाहिए- केशव प्रसाद मौर्य

5 फरवरी, 2026 फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह गांव गरीब के लिए संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन और बेहतर ढंग से करें।उन्होंने कहा कि प्रभावी और ठोस रणनीति बनाकर विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सोशल सेक्टर की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति को दिलाने के प्रयास पूरी गंभीरता व संवेदनशीलता के साथ किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी / कर्मचारी अच्छा कार्य करें, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के पास जनप्रतिनिधि समस्याएं लेकर के जाएं तो उनका समुचित व सम्यक समाधान करें व उन्हें संतुष्ट करें, कोई समस्या यदि उनके स्तर से हल होने वाली नहीं है, तो उसके बारे में भी स्पष्ट रूप से जनप्रतिनिधियों को बताते हुए उन्हें संतुष्ट किया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जन समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। किसान हितों को सर्वोपरि रखा जाए। विकसित भारत – जीरामजी अधिनियम का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया, इसके बारे में लोगों की भ्रांतियां का भी निवारण किया जाए। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सर्किट हाउस, फतेहपुर की विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि डबल इंजन सरकार की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता के साथ एवं निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियो को निर्देश दिये कि उत्तर प्रदेश मे 3 करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना है और एक करोड़ दीदियो को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेरणा कैंटीन का आकार बढ़ाया जाएगा और उत्पादों को बेचने के लिए अन्य प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ब्लॉक परिसरों में खाली जगह में स्टॉल दीदियों को उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे व्यापार कर आमदनी बढ़ा सकें।उन्होंने “विकसित भारत” के लक्ष्य पर जोर दिया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पीएम एफएमई योजना मे विकास खंडों में 5 करोड़ रुपये की लागत वाली इकाइयां स्थापित करने की कार्यवाही की जाय। जिनमें 35% सब्सिडी और महिलाओ को 90% सौर ऊर्जा सब्सिडी का प्राविधान है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकास खण्ड मे 25 हजार महिलाओ को स्वयं सहायता समूहो से जोड़ना है, इसके लिये गहन मानीटरिग की जाय और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करते हुये कार्य पूर्ण किया जाय। उन्होंने कहा कि महिलाओ को समूहो से जोड़ना ही नही है, बल्कि उन्हे पूरी तरह सक्रिय भी रखना है। समूहो के माध्यम से स्कूली ड्रेस बनवाने के प्रयास किये जांय और कहा कि शिक्षा विभाग से समन्वय कराकर अभिभावक गण ड्रेस खरीद सकते है, इसमे गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाय। समूहो को किसी भी दशा मे निराश नही होने देना है। समूहों के सभी सदस्यो की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाय। जहाँ पर सबसे ज्यादा सभी सदस्य सक्रिय होगे, उन्हे प्रशस्ति पत्र दिया जाय। कहा कि सी एल एफ के नीचे स्तर के भुगतान भी सीधे खातो मे ही किये जांय। विभाग को आवंटित बजट को समय से व्यय किया जाय। ग्राम चौपालों को नियमित रूप से आयोजित करने का भी निर्देश दिये और कहा कि इसके लिये एक माह पूर्व कलेण्डर जारी किया जाय। वहां पर सभी लाभार्थी परक योजनाओं के स्टाल लगाये जांय। उन्होंने अमृत सरोवरों को हरा-भरा रखने और उनमें पानी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।

उपमुख्यमंत्री ने “विकसित भारत” और “स्मार्ट गांव” के लक्ष्य पर जोर दिया, कहा कि गांवों के समग्र विकास से ही विकसित भारत के विजन को मूर्त रूप मिलेगा। उपमुख्यमंत्री ने विकसित भारत – जीरामजी अधिनियम का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार कराए जाने के निर्देश दिए।