बिहार में पराजय से बौखलाए गहलोत जनता में अराजकता फैला रहे है – मदन राठौड़
19 नवंबर, 2025 जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर लगाए गए गंभीर और आधारहीन आरोप निंदनीय हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इस प्रकार का हमला केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग देश की सबसे विश्वसनीय और संवैधानिक संस्था है। उस पर “बेवकूफी”, “मिलीभगत” और “खराब नीयत” जैसे शब्दों का प्रयोग करना अशोक गहलोत की हताशा और निराधार राजनीति को दर्शाता है। जब राजनीतिक जमीन खिसकने लगती है, तब ऐसे बयान कांग्रेस के नेताओं की आदत बन जाते हैं। एसआईआर तो वोटर लिस्ट को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया है। पहले भी एसआईआर होता रहा है। कांग्रेस जानबूझकर भ्रम फैला कर चुनावी व्यवस्था पर संदेह पैदा करना चाहती है, ताकि आने वाले चुनावों में अपनी संभावित हार का बहाना पहले से तैयार कर सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत द्वारा एसआईआर को आत्महत्याओं और बंगाल की घटनाओं से जोड़ना संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देने जैसा है। बिना किसी प्रमाण के इस तरह के दावे करना अत्यंत गैर- जिम्मेदाराना है। जनता ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेती।
गहलोत बार-बार “जनता को सड़कों पर आने” की बात कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को चुनौती देने जैसा है। यह साफ दिखाता है कि गहलोत बिहार चुनावी पराजय से डरे हुए है और वह जानबूझकर अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे है। बिहार में एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से 65 लाख ऐसे नामों को हटाया गया, जिसकी मृत्यु या पलायन या फिर नाम के दोहराव जैसे कारण सामने आए। ऐसे में इन लोगों का नाम डिटेक्ट और डिलीट करना गलत नहीं है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा पूरी तरह पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के पक्ष में है। चुनाव आयोग हर दल को समान अवसर देता है। आयोग पर इस तरह का हमला देश की संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत का बयान राजनीतिक दिवालियापन और बौखलाहट का चरम है। संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना कांग्रेस की आदत बन चुकी है। चुनाव आयोग पर उंगली उठाने से पहले गहलोत को अपने गिरते जनाधार और कांग्रेस की चरमराती हालत पर नजर डालनी चाहिए।

