धर्म रक्षा एवं गौ रक्षा हेतु “राष्ट्रीय धर्म सेवक संघ” की हुई स्थापना
10 नवंबर, 2025 जयपुर। श्री पिंजरापोल गौशाला, टोंक रोड, स्थित वैदिक वन औषधि पादप केंद्र में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक और राष्ट्रधर्मी संकल्प के साथ “राष्ट्रीय धर्म सेवक संघ” की स्थापना की गई। इस संगठन की स्थापना परम पूज्य स्वामी प्रकाश दास जी महाराज (ऋषि 1008) ने अपने 11 सहयोगी संतों और धर्मसेवकों के साथ मिलकर की।
इस अवसर पर आयोजित प्रथम धर्मसभा में यह संकल्प लिया गया कि यह संगठन पूरे भारतवर्ष में धर्म, गौ, और राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पित रहेगा। संघ का प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सनातन धर्म की परंपराओं की रक्षा करना, गौ संरक्षण को राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में पुनर्स्थापित करना, और भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक एकता को सुदृढ़ बनाना है।
संघ के मुख्य उद्देश्य: –
1.धर्म रक्षा एवं गौ रक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन का रूप देना। 2. हिंदू समाज को संगठित करना और हर ग्राम, ब्लॉक एवं ज़िला स्तर तक संगठन की इकाइयां स्थापित करना। 3. गौशालाओं, मंदिरों और संत समाज के समन्वय से एक सशक्त धर्मपरायण भारत की स्थापना करना। 4. युवा पीढ़ी में संस्कार, योग, वेद, गीता और भारतीय संस्कृति के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना। 5. गौ आधारित कृषि, स्वदेशी उत्पादों और भारतीय जीवन शैली को प्रोत्साहित करना।
राष्ट्रीय धर्म सेवक संघ की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संगठन की इकाइयाँ शीघ्र ही सभी राज्यों, ज़िलों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर तक गठित की जाएंगी। प्रत्येक इकाई में धर्म, संस्कृति और गौ संरक्षण से जुड़े कर्मयोगी कार्यकर्ता शामिल होंगे।
इस अवसर पर सर्वसम्मति से स्वामी प्रकाश दास महाराज को राष्ट्रीय धर्म सेवक संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि संगठन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया और कहा कि “गौ, धर्म और राष्ट्र तीनों अविभाज्य तत्व हैं। जो भारत को आत्मनिर्भर और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाएंगे। यह संगठन आने वाले समय में भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनेगा।”
महत्वपूर्ण निर्णय में – प्रत्येक राज्य में राज्य स्तरीय धर्म सेवक परिषद का गठन किया जाएगा, गौ रक्षा, महिला शक्ति, युवा संगठन और शिक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने वाले चार प्रमुख विभाग बनाए जाएंगे एवं सभी धर्मप्रेमियों से आव्हान किया गया कि वे इस संगठन से जुड़कर राष्ट्र और धर्म की सेवा में योगदान दें।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र की अखंडता, धर्म की रक्षा और गौमाता के संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया तथा ‘भारत माता की जय’ और ‘गोमाता की जय’ के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।

