Friday, September 4, 2026
Uttar Pradesh

उपभोक्ता मामले में विधिक माप विज्ञान सुधारों पर सम्मेलन हुआ आयोजित

3 सितंबर, 2026 लखनऊ। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार के विधिक माप विज्ञान विभाग के सहयोग से “विधिक माप विज्ञान सुधार और जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 का प्रभावी कार्यान्वयन” विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रधान सचिवों/नियंत्रकों, विधिक माप विज्ञान अधिकारियों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विधिक माप विज्ञान प्राधिकरणों तथा प्रमुख उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विधिक माप विज्ञान के क्षेत्र में हालिया सुधारों के कार्यान्वयन तथा राज्यों में अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और एकरूप नियामक ढांचे के विकास पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में लगभग 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

उद्घाटन सत्र को भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद ने संबोधित किया।

अपने मुख्य संबोधन में उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे ने कहा कि विधिक माप विज्ञान दैनिक आर्थिक गतिविधियों के केंद्र में है, क्योंकि यह लेन-देन में सटीकता, निष्पक्षता और विश्वास सुनिश्चित करता है। प्रधानमंत्री के पंच प्रण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये सुधार विकसित भारत के निर्माण, औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों से मुक्ति, भारत की क्षमताओं और विरासत पर गर्व, एकता को मजबूत करने तथा नागरिकों और संस्थानों में कर्तव्य की भावना को बढ़ावा देने के संकल्प में योगदान करते हैं।

उन्होंने रेखांकित किया कि विभाग का दृष्टिकोण ‘सुधार, प्रदर्शन, रूपांतरण और सूचना’ की भावना से निर्देशित है—अर्थात पुराने नियामक प्रक्रियाओं में सुधार, प्रभावी प्रदर्शन एवं सेवा वितरण सुनिश्चित करना, प्रौद्योगिकी के माध्यम से सेवाओं में बदलाव तथा उपभोक्ताओं और व्यवसायों को उनके अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी प्रदान करना। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों और व्यवसायों के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सरल, तेज और अधिक पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि कारोबार सुगमता के लिए उपभोक्ता संरक्षण को केंद्र में रखते हुए अनुपातिक, पूर्वानुमेय और विश्वास-आधारित विनियमन आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन विश्वास सुधारों सहित व्यापक विनियमन-मुक्ति एजेंडा का अर्थ निगरानी का अभाव नहीं है। इसका उद्देश्य अनावश्यक अनुमतियों, दोहराव वाली आवश्यकताओं और प्रक्रियात्मक स्तरों को हटाना तथा प्रवर्तन को वास्तविक उपभोक्ता जोखिम वाले क्षेत्रों पर केंद्रित करना है। स्वचालित पंजीकरण, सुधार नोटिस, सत्यापन और नवीनीकरण संबंधी आवश्यकताओं का युक्तिकरण तथा शुरू से अंत तक डिजिटल सेवाओं जैसे उपायों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना और विधिक माप विज्ञान प्राधिकारियों के साथ संवाद को सरल एवं अधिक पूर्वानुमेय बनाना है।

उन्होंने कहा कि भारत का विश्व का 13वां ऐसा देश बनना, जिसे OIML पैटर्न अनुमोदन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है, देश की विधिक माप विज्ञान प्रणाली में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्रों से घरेलू निर्माता अन्य देशों में बार-बार परीक्षण कराए बिना तौल और माप उपकरणों का निर्यात कर सकेंगे। इससे परीक्षण की लागत और समय कम होगा, वैश्विक बाजारों तक पहुंच बेहतर होगी तथा ‘मेक इन इंडिया’ को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने राज्यों, उद्योग और अन्य हितधारकों से समन्वित रूप से सुधारों को लागू करने का आह्वान किया, ताकि उपभोक्ताओं और वास्तविक व्यवसायों को इनका ठोस लाभ मिल सके।

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद ने अपने स्वागत संबोधन में गणमान्य अतिथियों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों तथा उद्योग संघों के प्रतिनिधियों का सम्मेलन में स्वागत किया। उन्होंने विधिक माप विज्ञान सुधारों को उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप लागू करने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया तथा एकरूप प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अनुमति-आधारित व्यवस्था से विश्वास-आधारित नियामक ढांचे की ओर सफल संक्रमण के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों की क्षमता निर्माण के महत्व को भी रेखांकित किया।

उपभोक्ता मामले विभाग के अपर सचिव अनुपम मिश्रा ने “विधिक माप विज्ञान सुधार: कारोबार सुगमता, उपभोक्ता संरक्षण और प्रभावी प्रवर्तन” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने अनुपालन-केंद्रित दृष्टिकोण से सुविधा-आधारित और विश्वास-आधारित नियामक व्यवस्था की ओर विधिक माप विज्ञान ढांचे में आए बदलाव को रेखांकित किया।

उन्होंने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत किए गए प्रमुख सुधारों की जानकारी दी, जिनमें अपराधों का गैर-अपराधीकरण, सुधार नोटिस की शुरुआत, दंड और शमन संबंधी प्रावधानों का युक्तिकरण तथा लाइसेंस आधारित व्यवस्था से पंजीकरण आधारित व्यवस्था की ओर संक्रमण शामिल है। उन्होंने बताया कि इन सुधारों से तकनीकी और अनजाने में हुए गैर-अनुपालनों को सुधारने का अवसर मिलेगा, जबकि गंभीर और लगातार किए जाने वाले उल्लंघनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

प्रस्तुति में सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (GATC) व्यवस्था को मजबूत किए जाने पर भी प्रकाश डाला गया। इसके तहत GATC द्वारा सत्यापित किए जा सकने वाले बाट और माप की श्रेणियों की संख्या 10 से बढ़ाकर 23 कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 51 GATC को मंजूरी दी गई है और लगभग 92,000 सत्यापन प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जिससे सत्यापन क्षमता का विस्तार हुआ है और उद्योग को सुविधा मिली है।

प्रस्तुति में उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करते हुए अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करने के उद्देश्य से हाल में किए गए विभिन्न उपायों की भी जानकारी दी गई। इनमें पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर के पुनःसत्यापन की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष करना; उच्च क्षमता वाले तौल उपकरणों के सत्यापन के लिए मानक बाट की आवश्यकता का युक्तिकरण; केवल निर्यात और अनुसंधान एवं विकास के लिए गैर-मानक बाट या माप के निर्माण हेतु पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त करना; चिकित्सा उपकरणों के लिए विधिक माप विज्ञान संबंधी आवश्यकताओं में सामंजस्य स्थापित करना तथा पैकेज्ड वस्तुओं में पारदर्शिता बढ़ाना शामिल है।

अपर सचिव मिश्रा ने विधिक माप विज्ञान प्रशासन में अधिक पारदर्शिता, एकरूपता और दक्षता लाने की दिशा में ई-माप डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित विधिक माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। ये नियम पूरे भारत में नागरिक, वाणिज्यिक और कानूनी उद्देश्यों के लिए मानक संदर्भ के रूप में एकीकृत और ट्रेस करने योग्य भारतीय मानक समय (IST) की व्यवस्था प्रदान करते हैं। CSIR-NPL, क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (RRSLs), ISRO और अन्य अधिकृत समय स्रोतों के माध्यम से पूरे देश में इसका प्रसार किया जाएगा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधिक माप विज्ञान अधिकारियों को मामलों के पंजीकरण और राजस्व सृजन के लक्ष्य नहीं दिए जाने चाहिए।

तकनीकी सत्रों में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के बीच सुधारों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। चर्चा में जन विश्वास सुधारों और सुधार नोटिसों का कार्यान्वयन; ई-माप के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन; राज्य विधिक माप विज्ञान/प्रवर्तन नियमों में सामंजस्य; GATC व्यवस्था को मजबूत करना; पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रियाओं को सरल बनाना; निरीक्षण और दंड का युक्तिकरण तथा अनावश्यक और दोहराव वाले अनुपालनों को कम करना शामिल रहा।

सत्रों में जोखिम-आधारित और डेटा-संचालित प्रवर्तन की दिशा में संक्रमण पर भी जोर दिया गया। इसमें जोखिम और पूर्व अनुपालन इतिहास के आधार पर लक्षित निरीक्षण, स्व-प्रमाणन और तृतीय-पक्ष अनुरूपता मूल्यांकन का उपयुक्त उपयोग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना तथा कार्यान्वयन के लिए अधिक एकरूप ढांचा विकसित करना शामिल है।

उद्योग जगत की ओर से सुश्री अपराजिता त्रिपाठी (FICCI), सुश्री ज्योति वीके (RAI), लोकेश (CAIT), इंजीनियर डी. पी. सिंह (ASSOCHAM), प्रबोध हल्दे (SEA) तथा सुश्री रीना भार्गव (PHD चैंबर) ने चर्चा में भाग लिया और सुधार प्रक्रिया में उद्योग का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

भारत सरकार की ओर से सचिव और अपर सचिव के अतिरिक्त संयुक्त सचिव सुश्री इमकोंगला जमीर एम., निदेशक, विधिक माप विज्ञान आशुतोष अग्रवाल तथा वरिष्ठ विधिक माप विज्ञान अधिकारियों ने सम्मेलन में भाग लिया और विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन में संबंधित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और विधिक माप विज्ञान सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श में योगदान दिया। राज्य स्तर पर मध्य प्रदेश सरकार की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी, मध्य प्रदेश के नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान श्री ब्रजेश सक्सेना तथा उत्तराखंड सरकार की अपर सचिव/नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान श्रीमती रुचि मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ विधिक माप विज्ञान अधिकारियों ने भाग लिया।

वरिष्ठ अधिकारियों ने जन विश्वास सुधारों के कार्यान्वयन, राज्य प्रवर्तन नियमों में सामंजस्य, कारोबार सुगमता तथा अधिक सुविधाजनक और विश्वास-आधारित नियामक दृष्टिकोण अपनाने के संबंध में अपने विचार साझा किए। उनकी भागीदारी से जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और देशभर में विधिक माप विज्ञान ढांचे के कार्यान्वयन में अधिक एकरूपता की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण राज्य-स्तरीय दृष्टिकोण सामने आया।

सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि इन सुधारों को जमीनी स्तर पर परिणामों में बदलने में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि वे प्रमुख प्रवर्तन एजेंसियां हैं। राज्यों से संशोधित विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के अनुरूप अपने विधिक माप विज्ञान प्रवर्तन नियमों को बनाने, सुधार नोटिसों को उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप अपनाने, अनावश्यक अनुमतियों और अनुपालनों को समाप्त करने, डिजिटल कार्यान्वयन में तेजी लाने तथा देशभर में प्रवर्तन में अधिक एकरूपता को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने का आग्रह किया गया।

विचार-विमर्श में इस बात की पुनः पुष्टि की गई कि विधिक माप विज्ञान सुधारों का अगला चरण “विश्वास के माध्यम से अनुपालन, जोखिम के माध्यम से प्रवर्तन और प्रौद्योगिकी के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण” के सिद्धांत से निर्देशित होगा।

इसका उद्देश्य ऐसा विधिक माप विज्ञान ढांचा तैयार करना है, जिसमें वास्तविक व्यवसायों के लिए अनुपालन सरल और पूर्वानुमेय हो, प्रवर्तन संसाधनों को वास्तविक उपभोक्ता जोखिम वाले क्षेत्रों पर केंद्रित किया जाए तथा उपभोक्ताओं को कम आपूर्ति, गलत माप, भ्रामक घोषणाओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं के विरुद्ध मजबूत संरक्षण मिलता रहे।